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एंबुलेंस तो हैं पर...मरीज को अस्पताल कौन पहुंचाए

Sun, 03 Sep 2017 10:03 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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मरीजों को समय पर और सही इलाज मिल सके इसके लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहीं। एंबुलेंस तो हैं पर उनके अंदर रखी दवाएं बीमार हैं। 
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औरैया जिले में चल रही 102 और 108 एंबुलेंसों में इमरजेंसी मरीजों के लिए पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था तो है, लेकिन सफाई का इंतजाम नहीं दिखाई देता है। जबकि प्रसूता हो या दुर्घटनाग्रस्त मरीज, उनको ले जाते समय एंबुलेंस में सफाई होना अति आवश्यक है। लेकिन ऐसा नहीं है, एंबुलेंस में रखी दवाओं में धूल जम रही है। उन्हें नियमित साफ तक नहीं किया जाता है। जिले में 102 की 13 और 108 की 16 एंबुलेंस हैं।

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बता दें कि 102 एंबुलेंस प्रसूताओं के लिए व 108 इमरजेंसी मरीजों के लिए होती है। नियम के मुताबिक सभी एंबुलेंसों में आक्सोमीटर,  आक्सीजन सिलेंडर और बेड की व्यवस्था होना अनिवार्य है। एंबुलेंस में एक चालक और एक ईएमटी रहता है। लेकिन जिले की 102 एंबुलेंस में जिस बाक्स में दवाएं रखी जाती है। इस बाक्स को खोलते ही उससे धूल निकलती है। इसके साथ ही एक एंबुलेंस में दाई तरफ एक सीट ही गायब थी।

 
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अगर इमरजेंसी में किसी का फोन आ जाए तो मौके पर सीट न होने से मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ईएमई राजीव कुमार ने बताया एंबुलेंस के अंदर रखे उपकरण को रोज साफ किया जाता है। जो एंबुलेंस 15 हजार किमी चल चुकी होती है। उसको मरम्मत के लिए भेज दिया जाता है। जिसके रुपये शासन से दिए जाते है।यदि एंबुलेंस के किसी पार्ट में कमी आ गई है, तो उसे मरम्मत के लिए रनिया भेज दिया जाता है। इन दावों के बीच फायर बिग्रेड स्टेशन में खड़ी 102 एंबुलेंस का आगे का हिस्सा काफी जर्जर दिखा, जिससे उनकी पोल खुल गई। जिले में चार एंबुलेंस में एसी भी नहीं है। 

-एंबुलेंस की बैठने वाली सीट गायब
- एंबुलेंस के आगे का पार्ट जर्जर
- एंबुलेंस में बने बाक्स में धूल।
-एंबुलेेंसों में रखी दवाओं पर जम रही धूल 
 
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