लॉकडाउन की वजह से शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू तो करा दी गई है लेकिन इंटरनेट स्लो होने और बार-बार कनेक्टिविटी टूटने से उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। एक साथ कई छात्रों को कनेक्ट करने में समस्या आती है तो कहीं पढ़ाई के बीच में इंटरनेट ही दगा दे जाता है। वहीं, यूपी बोर्ड में अभी भी कई छात्रों के पास थ्री जी फोन है, साथ ही ज्यादा डाटा खर्च होने की भी शिकायत आती है।
छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने बताया कि नेट की स्थिति बेहद ख्रराब है। कई बार बैठक के दौरान ही नेट चला जाता है। शिक्षकों ने कभी शिकायत नहीं की, लेकिन इंटरनेट की स्पीड की हालत छिपी नहीं है। शिक्षकों से कहा गया है कि वह समय को ऐसे तय करें कि सही नेट स्पीड के मिले और पढ़ाई कराई जा सके। कुछ शिक्षक ऐसा कर भी रहे हैं।
यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट के प्रभारी डॉ. विवेक सचान ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट में दिक्कत आती है। शहर के तो बच्चे कनेक्ट हो जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे नेट आने और जाने की वजह से कनेक्ट नहीं हो पाते हैं। डॉ. विवेक कहते हैं कि जूम मीटिंग एप से पढ़ाते हैं। रोजाना एक जीबी डेटा तो खर्च हो जाता है।
एचबीटीयू के प्रति क़ुलपति प्रो. मनोज शुक्ला ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से सभी लोग फ्री हैं और नेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस वजह से स्पीड कम रहती है। कई बार बीच पढ़ाई में कनेक्शन टूट जाता है, जिससे काफी दिक्कत होती है। इसका तोड़ निकाला है कि बच्चों के साथ शाम को पढ़ाई करते हैं। सात से आठ बजे के बीच कक्षाएं चलाते हैं। इस बीच लोड कम रहता है। प्रो. शुक्ला कहते हैं कि नेट तो रोज बेटी से उधार लेना पड़ जाता है।
यूपी बोर्ड के स्कूलों के पास तो ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर केवल सोशल मीडिया का ही सहारा है। व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पढ़ाई करवाते हैं। डीआईओएस सतीश तिवारी ने बताया कि जिले के स्कूलों को 14 वर्गों में बांटा है। सभी 14 प्रभारियों को ऑनलाइन पढ़ाई की सूचना देने की जिम्मेदारी सौंपी हैं। तिवारी कहते हैं कि बाकी एप के लिए हाईस्पीड डाटा चाहिए होता है, जो यूपी बोर्ड के सभी स्कूलों के लिए संभव नहीं है।