कानपुर। ग्राम प्रधान और सचिवों ने मिलीभगत कर मनरेगा मजदूरों की आईडी से एक लाख रुपये का भुगतान अपने करीबियों के खातों में करा लिया। ग्रामीण की शिकायत पर टीम ने जांच की तो फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। मामला सरसौल ब्लाॅक के निवादा बौसर गांव का है। इसमें दो सचिव, प्रधान, तकनीकी सहायक और एपीओ दोषी पाए गए। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने दोनों सचिवों और तकनीकी सहायक पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही एपीओ की सेवासमाप्ति का नोटिस जारी किया। वहीं, प्रधान पर कार्रवाई करने के लिए डीपीआरओ को निर्देश दिए हैं।
सरसौल ब्लाॅक के निवादा बौसर के रहने वाले भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने ग्राम प्रधान समरजीत सिंह के खिलाफ मनरेगा में गलत तरीके से भुगतान कराने की शिकायत सीडीओ दीक्षा जैन से की थी। बताया था कि मनरेगा मजदूरों की आईडी से प्रधान ने ग्रामीणों के खाते में वर्ष 2019 से 2022 तक गलत तरीके से भुगतान किया है। सीडीओ ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच कराई तो पता चला कि ग्राम प्रधान समरजीत सिंह की मांग पर जॉब कार्डों में भुगतान किया गया। इसमें पंचायत सचिव हरिकृष्ण पाल ने वर्ष 2019 से 2021 तक और पंचायत सचिव सुरेंद्र गौतम ने तकनीकी सहायक प्रमेश यादव की मदद से वर्ष 2021 से 2022 तक करीब 99,912 रुपये मजदूरों के खाते में न भेजकर ग्रामीणों के खातों में भुगतान किया है। रिपोर्ट जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने प्रस्तुत की गई तो उन्होंने सचिव और तकनीकी सहायक पर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश बीडीओ सरसौल निशांत राय को दिए हैं। वहीं, प्रधान और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश डीपीआरओ को दिए हैं। एपीओ सर्वेश कुमार को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सचिवों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होगी।