राष्ट्रीय कोविड सुपर मॉडल समिति ने जनवरी (2022) में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जाहिर कर दी है। लेकिन अस्पतालों में कोरोना ओमिक्रॉन वैरिएंट से निपटने की तैयारी और सतर्कता की बात तो दूर कोविड की दूसरी लहर में की गई व्यवस्था भी गायब है।
संक्रमितों की पहचान के लिए बनाया गया फ्लू कॉर्नर अब नहीं है। संदिग्ध रोगियों को अलग रखने की व्यवस्था भी गायब है। अस्पतालों में सारे बेडों पर रोगी भर लिए जा रहे हैं। हालांकि शहर में अभी ओमिक्रॉन की पुष्टि नहीं है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की आशंका जाहिर कर दी है।
यह भी कहा जा रहा है कि हो सकता है ओमिक्रॉन संक्रमित पकड़ में नहीं आ पा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बुनियादी व्यवस्था यह की गई थी कि रोगी जैसे ही अस्पताल में दाखिल हो और लक्षण नजर आएं तो उसकी जांच अलग फ्लू कॉर्नर में की जाए। फिर सैंपल लेकर जांच कराएं तब तक उसे अलग क्षेत्र में रखें।
पॉजिटिव आने पर संबंधित अस्पताल भेज दें। लेकिन जब कोविड का दर्जा पाने वाले स्वरूपनगर और सिविल लाइंस के अस्पतालों में व्यवस्था देखी तो लापता थी। आम दिनों की तरह रोगी भर्ती किए जा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति हैलट में भी है। यहां तीन विशेषज्ञों की कमेटी बनाई गई थी जिन्हें यहां आने वाले रोगी की जांच करके तय करना था कि कोविड संक्रमित है कि नहीं। यह कमेटी अब निष्क्रिय हो गई है। अगर संक्रमित आ गया तो वह आम रोगियों के बीच ही रखा जाएगा।
अभी ओमिक्रॉन संक्रमित नहीं मिला है। लेकिन ओमिक्रॉन प्रभावित देशों से तीन सौ से अधिक लोग आ चुके हैं। ऐसे में आशंका बनी है कि संक्रमित कहीं से आ सकता है। इसके लिए सतर्कता बरतने के अस्पतालों को निर्देश जारी किए गए हैं। नए प्वाइंट पर रैंडम सैंपलिंग भी करा रहे हैं।
डॉ. नैपाल सिंह, सीएमओ
तीसरी लहर संभावित है। इसका खतरा बना हुआ है। व्यवस्था को एक्टीवेट किया जा रहा है। अगर संक्रमित आए तो इलाज में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
डॉ. संजय काला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कालेज