कोरोना की वैक्सीन लगाने के लिए फ्रंट लाइन वर्कर के बाद प्राथमिकता पर कोमॉर्बिड (पहले से किसी बीमारी से ग्रसित) रोगी हैं। कोरोना संक्रमण के बाद जान जाने का खतरा इन्हीं रोगियों को रहता है। अभी तक कोरोना संक्रमितों की जो मौत हुई हैं, उनमें 95 फीसदी रोगी कोमॉर्बिड रहे हैं।
शहर में इनकी संख्या करीब 15 लाख बताई जा रही है। इनमें 55 साल से अधिक कोमॉर्बिड रोगियों को दो से अधिक बीमारियां हैं। कोरोना संक्रमित रोगियों के डेथ ऑडिट में ज्यादातर को डायबिटीज, हाइपरटेंशन, अस्थमा, दमा, गुर्दा रोग, लिवर रोग, कैंसर आदि रोग रहे हैं।
55 साल के ऊपर के जो कोरोना संक्रमित रोगी आए हैं, उनको दो से अधिक बीमारियां रही हैं। लेकिन 70 फीसदी को डायबिटीज और हाइपरटेंशन रहा है। इसके साथ ही किसी के लिवर और किसी के गुर्दे में भी दिक्कत रही है। सरकारी अस्पतालों और निजी चिकित्सकों केे यहां आए रोगियों के आंकड़ों के आकलन के मुताबिक जिले में कोमॉर्बिड रोगियों की संख्या करीब 15 लाख है।
इनमें 30 से 40 साल के रोगियों में एक रोग, 41 से 55 साल के रोगियों में दो रोग और इससे अधिक उम्र के लोगों में दो से अधिक रोग हैं। सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 17 जोन में 60 साल के ऊपर के कोमॉर्बिड रोगियों को चिह्नित किया है।