कानपुर। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की मेहनत पर सुस्त अधिकारी पानी फेर रहे हैं। वह शिकायतों का निस्तारण गंभीरता से नहीं कर रहे हैं। इससे आईजीआरएस रैंकिंग मई माह में सात अंक लुढ़ककर 68वें पायदान पर पहुंच गई। इसका सबसे बड़ा कारण सीएम कार्यालय से लिए गए फीडबैक में 4,539 फरियादियों का असंतुष्ट मिलना पाया गया है।
आईजीआरएस रैंकिंग में जिले का प्रदेश में काफी खराब प्रदर्शन रहा है। अफसर अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं कर रहे हैं। डीएम की सख्ती के बाद मार्च माह में जिले को 41वीं रैंक हासिल हुई थी। अगले ही माह अप्रैल में 61वीं रैंक पहुंच गई। अब मई माह में सात अंक और लुढ़क गई। मई माह में जिले में 10,943 शिकायतें अलग-अलग विभागों की आईं। इनके निस्तारण में कुल 140 में 103 अंक मिले। प्राप्तांक प्रतिशत 73.57 ही रहा। सीएम कार्यालय से 7,768 शिकायतों में फीडबैक लिए गए। इनमें 4,539 लोगों ने असंतोष जताया। 3,229 ने ही संतोषजनक निस्तारण की बात कही। इससे साफ जाहिर होता है कि जिलास्तरीय अधिकारी शिकायतों के निस्तारण में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। इसके साथ ही चारों तहसीलों बिल्हौर, सदर, घाटमपुर व नर्वल में भी अफसर लचर तरीके से काम कर रहे हैं। इससे रैंकिंग में असर पड़ रहा है।
जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों के निस्तारण में जिलास्तरीय अधिकारी लगातार लापरवाही बरत रहे हैं। अब अफसरों की सूची तैयार होगी। उन्हें कार्यालय में बुलाकर जवाब तलब किया जाएगा। इसके बाद इनके खिलाफ शासन को पत्र लिखेंगे। - जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी।