कानपुर देहात। जिले में सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर जूट के बोरों में सिलाई की समस्या बनी थी। इधर पश्चिम एशिया के बिगड़े हालात की वजह से अब प्लास्टिक बोरियों की पांच सौ गांठें मिल सकीं हैं। क्रय केंद्रों पर इन बोरियों में ही गेहूं की खरीद हो रही है।
रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय है। जिले में पांच एजेंसियों के कुल 58 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। करीब छह हजार से अधिक किसानों ने गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीयन कराया है। अब तक 2489 किसानों से 13,866 मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा जा चुका है। 30 मार्च से क्रय केंद्र खुल गए थे। गेहूं खरीद की शुरुआत में बारदाना का टोटा रहा। इधर जूट का बारदाना मिला तब तक खुले बाजार में गेहूं के दाम बढ़कर 24 सौ रुपये के पार हो गए।
हालांकि सरकारी क्रय केंद्रों पर अभी भी किसान गेहूं बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। अब गेहूं की सरकारी खरीद एक माह और होगी। इधर अब प्लास्टिक बारदाना की खेप पहुंच गई है। जैनपुर, रनियां, झींझक प्रथम व द्वितीय, डेरापुर, संदलपुर व राजपुर क्रय केंद्रों पर 10-10 गांठें बारदाना भेजा गया है। वहीं अन्य केंद्रों पर पांच-पांच गांठें बारदाना आवंटित किया गया है। प्रति गांठ में पांच सौ बोरी है।
प्लास्टिक बारदाना क्रय केंद्रों पर पहुंचने से गेहूं खरीद में सहूलियत हुई है। बोरियों की मशीन से सिलाई भी आसान है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्लास्टिक बारदाना की खेप क्रय केंद्रों पर भेजी गई है। इससे गेहूं खरीद में सहूलियत होगी। सभी क्रय केंद्रों पर पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है।
जूट के बोरों की मशीन से सिलाई में हो रही थी दिक्कत
जूट के बोरों में सिलाई की समस्या बनी थी। मशीन से इन बोरों की सिलाई में समय लग रहा था। सिलाई के समय धागा फंस जाता था। इसकी वजह से क्रय केंद्रों पर खरीदा गया गेहूं खुले बोरों में रखा होने से बफर गोदाम नहीं भेजा जा सका है। हालांकि अब प्लास्टिक बोरे उपलब्ध हो गए हैं। अब जूट के बोरों की प्राथमिकता से सिलाई कर इन्हें जैनपुर बफर गोदाम भेजने की तैयारी है।