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Kanpur: ब्रेस्ट कैंसर की मार्कर जांचें अब मेडिकल कॉलेज में, नहीं जाना होगा लखनऊ, मुंबई

Wed, 20 Jul 2022 08:20 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

जेके कैंसर इंस्टीट्यूट और हैलट में कुल कैंसर रोगियों के 10 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर के रोगी होते हैं, लेकिन मार्कर जांचों की सुविधा न होने से इलाज में देरी हो जाती थी। पैथोलॉजी विभाग में मार्कर जांचों की अत्याधुनिक सिस्टम वर्ष 2017 में आ गया था, लेकिन इसे अब शुरू किया गया है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ब्रेस्ट कैंसर की मार्कर जांचों के लिए मरीजों को अब मुंबई और लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में जांचें शुरू हो गई हैं। विभाग में मंडल की पहली इम्युनो हिस्टोकेमिस्ट्री लैब शुरू हो गई है। ब्रेस्ट कैंसर, ट्यूमर के जो रोगी सर्जरी विभाग में आते हैं, उनकी पंच बायोप्सी कर ली जा रही है। अत्याधुनिक लैब सिस्टम होने की वजह से रोगी की जांच रिपोर्ट तीन दिन में मिल जाती है।

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बाहर जांच कराने के बाद रिपोर्ट एक महीने में आती है। पैथोलॉजी की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन लता वर्मा ने बताया कि मंडल के जिलों में यह इकलौती लैब है। मुफ्त जांच की जा रही है। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट और हैलट में कुल कैंसर रोगियों के 10 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर के रोगी होते हैं, लेकिन मार्कर जांचों की सुविधा न होने से इलाज में देरी हो जाती थी।

पैथोलॉजी विभाग में मार्कर जांचों की अत्याधुनिक सिस्टम वर्ष 2017 में आ गया था, लेकिन इसे अब शुरू किया गया है। इम्युनो हिस्टोकेमिस्ट्री लैब का औपचारिक उद्घाटन सात जुलाई को हुआ। अब जांचें ढर्रे पर आ गई है। लैब में 30 जांचें हो चुकी हैं। पैथोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चयनिका काला ने बताया कि लैब में ओरल कैंसर, अंडाशय के कैंसर आदि की जांचें भी शुरू की जाएंगी। अभी ब्रेस्ट कैंसर की जांचें हो रही हैं।
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विभागाध्यक्ष डॉ. वर्मा ने बताया कि सर्जरी विभाग में एक रेजीडेंट पंच बायोप्सी लेता है। सैंपल समय से आ जा रहे हैं। अभी सुविधा हैलट के रोगियों को ही दी जा रही है। रेट लिस्ट तय हो जाने पर बाहर के रोगी भी लैब का लाभ ले सकेंगे।

क्या होती है मार्कर जांच
कैंसर मार्कर में एस्ट्रोजन रिसेप्टर, प्रोजेस्ट्रान रिसेप्टर आदि की जांच होगी। इसमें कोशिकाओं का शुरुआती बदलाव पता चल जाता है। इसे कैंसर मार्कर कहते हैं। इन जांचों से कैंसर की गांठ बनने के पहले ही पता चल जाता है कि अमुक स्थान पर रोग पनप रहा है। यह टेस्ट कोशिकाओं में होने वाले रासायनिक बदलाव को भी पकड़ लेता है।
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