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अब पुलिस @ व्हाट्सएप

Fri, 20 Nov 2015 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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कानपुर जोन के नौ जिलों के 177 थानों का व्हाट्सएप ग्रुप जल्द ही बनाया जाएगा। इस पर थाना प्रभारी, दरोगा, सिपाही और होमगार्ड तक जुड़ेंगे। फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया का प्लेटफार्म भी बनाया जाएगा।
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प्रत्येक थाने का एक व्हाट्सएप ग्रुप होगा जिसमें दरोगा से लेकर सिपाही और होमगार्ड सभी जुड़े होंगे। जिसकी मॉनीटरिंग थानेदार करेंगे। इसके साथ ही थाने में तैनात सिपाही दस अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाएंगे। प्रत्येक ग्रुप में इलाके के सौ-सौ लोगों को जोड़ा जाएगा। जिससे एक हजार लोग सीधे थाने के संपर्क में आ जाएंगे।

इस व्हाटसएप ग्रुप पर इलाके के नागरिक अपनी शिकायतें करने के साथ ही, सुझाव भी दे सकेंगे। आईजी आशुतोष पांडेय ने सिविल लाइंस स्थित रागेन्द्र स्वरूप ऑडिटोरियम में गुुरुवार को आयोजित वर्कशॉप में यह जानकारी दी।
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इस वर्कशाप में कानपुर जोन के नौ जिलों, कानपुर नगर, देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, औरैया, इटावा, झांसी, ललितपुर आदि से 10 सबइंस्पेक्टर, 15 सिपाही, 30 स्कूलों से एक-एक स्टूडेंट, कंप्यूटर टीचर, आईआईटी के रिसर्च स्कॉलर, फेसबुक पर सक्रिय रहने वाले लोगों ने हिस्सा लिया।

वर्कशाप की जरूरत बताते हुए आईजी ने कहा के समय के साथ-साथ अपराधी और अपराध दोनों बदल रहे हैं। इसलिए पुलिस नहीं बदलेगी तो अपराधों पर काबू पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। आईजी ने कहा कि व्हाट्सएप, आज इतना लोकप्रिय हो गया है कि इसे आम बोलचाल की भाषा में व्हाट्सएपवा तक कहने लगे हैं।

पुलिस के ग्रुप पर जोक्स, बधाई सहित अन्य कुछ भी शेयर नहीं किया जाएगा। व्हाट्सएप ग्रुप पर सिर्फ शिकायतें ही पोस्ट की जाएंगी ताकि ग्रुप की विश्वसनीयता बनी रहे। मुख्य अतिथि रिटायर्ड आईएएस आरएन त्रिवेदी ने आईजी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे पूरे मंडल और लाखों पीड़ितों को मदद मिलेगी।

डीआईजी एन चौधरी ने सोशल मीडिया के पॉजिटिव रोल को अपनाने पर जोर दिया। ‘अमर उजाला’ कानपुर के स्थानीय संपादक विजय त्रिपाठी ने कहा कि व्हाट्सएप जैसे माध्यमों पर कड़ी निगरानी की जरूरत है।

अभी हाल ही में दर्शनपुरवा का सांप्रदायिक मामला सबसे बड़ा उदाहरण है। जिसमें तमाम अफवाहें व्हाट्सएप के माध्यम से फैलाई गईं थीं। हिंदुस्तान कानपुर के स्थानीय संपादक मनोज पमार ने कहा कि सोशल साइट्स 20 साल पहले आ गई थीं। फेसबुक 11 साल और व्हाट्सएप को छह साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक हम इनका शुरुवाती दौर मान रहे हैं।

हाल ही में दो बड़े नेताओं की मृत्यु की खबर सोशल मीडिया पर आ गई थी। दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश अवस्थी ने कहा कि सोशल मीडिया से क्रांति जरूर आई है, लेकिन यह क्रांति इतनी भी बड़ी न हो जाए कि एक ही घर में माता-पिता, भाई-बहन सब व्हाट्सएप पर ही जुड़े हैं और उसी प्लेटफॉर्म पर गुड मॉर्निंग और गुड नाइट करते हैं। यह ध्यान रखना होगा कि इतने न जुड़ जाएं कि अपनों से बहुत दूर हो जाएं।

पुलिस के लिए सोशल मीडिया जरूरी
आईआईटी के रिसर्च स्कॉलर्स जे आदर्श ने अपने प्रजेंटेशन में बताया कि दुनिया का हर पांचवां आदमी फेसबुक पर है। इंस्टाग्राम पर चार सौ मिलियन और ट्विटर पर तीन सौ सात मिलियन लोग हैं। पुलिस के लिए सोशल मीडिया से जुड़ना बहुत जरूरी है। इससे पब्लिक एनाउंसमेंट, चेतावनी, सेफ्टी गाइड लाइन भी जारी की जा सकती है।

ऐसे बचें धोखे से
असुरक्षित इंटरनेट का इस्तेमाल करने से आपके  लैपटाप- मोबाइल का आईपी एड्रेस हैक हो सकता है। हमेशा सुरक्षित इंटरनेट का इस्तेमाल करें, कामन वाई - फाई का इस्तेमाल करने से बचें।


तुरंत मैसेज फारवर्ड न करें
बगैर पूरी जानकारी और परिणाम सोचे-समझे व्हाट्स एप, फेसबुक पर कोई मैसेज न तो फारवर्ड करना चाहिए और न शेयर। इसके खराब रिजल्ट भी भुगतने पड़ सकते हैं। सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट से बचने की जरूरत है।

यह विचार गुरुवार को आईजी आशुतोष पांडे ने ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन, जवाहर नगर में ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ के कार्यक्रम ‘पुलिस की पाठशाला’ में रखे।

बच्चों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि आईजी ने कहा कि आज सोशल मीडिया की पहुंच बहुत दूर तक हो गई है। हर हाथ में मोबाइल है और लोग नेट फ्रेंडली हो गए हैं। इससे देश-दुनिया तक पहुंच आसान हो गई है, जानकारी हासिल करना और देना आसान हो गया है और अपडेट रहने में भी मदद मिलती है।

लेकिन, इसके साइड इफेक्ट भी हैं जिन्हें कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देखने में आ रहा है कि अधिकतर युवा फेसबुक, व्हाट्सएप पर आए मैसेज या पिक्चर बिना सोचे-समझे झट से फारवर्ड या शेयर कर देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। जरूरी नहीं कि ये मैसेज, पिक्चर सही हों।

अराजकतत्व पिक्चर में छेड़छाड़ करके भड़काऊ बना देते हैं और उसे शेयर करने वाला भी दोषी बन जाता है। यही हाल मैसेजों में भी है। लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें भड़काने वाली पिक्चर और मैसेज बिल्कुल झूठे पाए गए हैं। इसलिए शेयर और फारवर्ड करने में सावधानी बरतें।

इसके अलावा युवा खासकर लड़कियां अपनी पिक्चर की सिक्योरिटी सुनिश्चित रखें ताकि कोई फोटो से छेड़छाड़ न कर सके। अगर कोई ऐसा करता है तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें। ऐेसे मामलों से निपटने के लिए साइबर सेल है। बच्चों को सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट से बचने की जरूरत है। आईजी ने कहा कि समय के साथ पुलिस भी बदल रही है।

समाज में शिक्षा का प्रचार-प्रसार होने से पुलिस की जवाबदेही बढ़ गई है। इसलिए पुलिस को भी हाईटेक किया जा रहा है। एक नंबर भरोसे का चालू है और अब पुलिस को व्हाट्सएप पर भी लाया जा रहा है। इससे लोगों को शिकायतें दर्ज कराने में आसानी होगी और पुलिसिंग भी स्मार्ट होगी।
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कार्यक्रम के दौरान सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों ने किए। विद्यालय के प्रधानाचार्य राममिलन सिंह ने आईजी का स्वागत किया।
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