अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले नगर विकास मंत्री आजम खां ने गुरुवार को यहां सरसैया घाट पर ‘गंगा की पुकार’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में किसी हिंदू नेता की तरह बयानबाजी करके सबको चौंका दिया।
गाय, गंगा, तुलसी को सबका बताते हुए उन्होंने सबका मालिक एक का संदेश दिया। आजम खां ने गंगा तट पर बैठकर गंगाजल हाथ में लेकर गंगा बचाने का संकल्प भी लिया।
वे बोले, गंगा, यमुना, गाय, तुलसी, पीपल तो मालिक की निशानियां हैं और सबका मालिक एक है। हम गंगा जल से वजू करके ही हज, उमरा जाते हैं तो हम गंगा को साफ करके ही रहेंगे। गंगा हम सबकी हैं और सब मिलकर इसे बचाने में जुटें। गंगा की सफाई भाजपा का चुनावी मुद्दा था। लेकिन, हम इसकी सफाई के लिए वचनबद्ध हैं।
लोग पालीथिन, कूड़ा फेंकना बंद कर गंगा सफाई में सहयोग करें। गंगा में गिर रहे नालों को किसी महानाले से नहीं जोड़ा जा सकता। हां, यह जरूर है कि पैसा हो तो गंदे पानी को पीने योग्य बना सकते हैं। केंद्र सरकार ने जो प्लान कोर्ट में दिया, उससे तो गंगा 500 साल में भी साफ नहीं हो सकतीं।
आजम ने कहा कि पिछले कुंभ की सफलता के बाद हमने सऊदी अरब से कहा है कि हम वहां भी सफल आयोजन कर सकते हैं। पिछले दिनों बीफ को लेकर देश-विदेश तक मचे हंगामे पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा हमारे नबी (पैगंबर-ए-इस्लाम) ने गाय के गोश्त को नापसंद किया है, उसके दूध,घी को पसंद किया है।
बूचड़खाने बंद हों, टेनरियां कम हो जाएंगी
नगर विकास मंत्री आजम खां ने कहा है कि बूचड़खाने बंद हो जाएं तो टेनरियां स्वत: कम हो जाएंगी। इन कारखानों का गोश्त हलाल नहीं है। गुरुवार को सरसैया घाट पर ‘गंगा की पुकार’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में आए आजम ने गंगा की सफाई के मद्देनजर यह बात कही।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वाराणसी में घाट, सड़कें ‘दाढ़ी’ वाले ने नहीं चमकाईं, बल्कि टोपी वाले (आजम) ने चमकाई हैं।
प्रदेश सरकार ने गंगा जल को चांदी जैसा करने के लिए केंद्र सरकार को चार हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था, जो बढ़कर छह हजार करोड़ हो गया, पर केंद्र ने डेढ़ साल में डेढ़ रुपया भी नहीं दिया।
प्रदेश में गंगा सफाई के लिए जो भी हो रहा है, वह आपकी (जनता की) गाढ़ी कमाई से हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि योग को तिलक लगाने से नुकसान हुआ है।