गंगा में जा रहे प्लास्टिक कचरे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार का जर्मनी की सरकार से अनुबंध हुआ है। इसके लिए गंगा किनारे स्थित कानपुर और समुद्र किनारे के दो शहरों (पोर्ट ब्लेयर और कोच्चि) का चयन किया गया है। इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट के तहत जर्मनी के अर्बन एंड इंडस्टि्रयल डेवलपमेंट विभाग की जीआईजेड टीम ने सीओडी नाले में पन्नियां, कचरा रोकने वाला बूम बैरियर देखा।
करीब 60 फीसदी सिविल कार्य पूरा हो गया
पनकी भऊ सिंह कूड़ा निस्तारण प्लांट में एमआरएफ प्लांट लगाने के लिए चल रहे निर्माण कार्य का जायजा लिया। इसका करीब 60 फीसदी सिविल कार्य पूरा हो गया है। यहां जर्मनी से आने वाली विशेष मशीन के जरिये कूड़े से प्लास्टिक, लोहा, मलबा और अन्य मैटेरियल अलग-अलग किया जाएगा।
तीन वार्डों का कूड़ा अलग उठेगा
डॉ. अमित सिंह के मुताबिक, सरायमीता में प्लांट का काम पूरा होते ही जर्मनी से मशीन कानपुर भेजी जाएगी। इसके बाद आसपास के तीन वार्डों का कूड़ा इसी प्लांट में अलग-अलग कर निस्तारित किया जाएगा। इस प्लांट में रोजाना करीब पांच मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारित किया जा सकेगा। पनकी, सरायमीता, आवास विकास-3 वार्ड से कूड़ा प्लांट में भेजा जाएगा।
कचरे को समुद्र में जाने से रोकने के लिए हो रहा काम
इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट के तहत कचरे को समुद्र में जाने से रोकने के प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इसी प्रोजेक्ट के तहत भारतीय और जर्मन के पर्यावरण विशेषज्ञ गंगा के जरिये समुद्र के मरीन वाटर में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने पर काम कर रहे हैं।