केंद्र सरकार का नोट बंदी का फैसला तो सही है लेकिन सरकार को हवा बंदी की भी चिंता करनी चाहिए। पूरे देश में पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। केंद्र व राज्यों की सरकारें खामोश बैठीं हैं। इटावा की पर्यावरण छात्र संसद का संदेश पूरे देश में जाएगा। ये बात शनिवार को पर्यावरणविद पदम श्री डा. अनिल जोशी ने नुमाइश पंडाल में पर्यावरण सम्मेलन व छात्र संसद में ही।
डा. जोशी ने कहा कि पर्यावरण का संकट इसलिए भी है क्यों कि पुरानी पीढ़ी ने पर्यावरण की चिंता नहीं की। सरकारें भी इस मामले पर उदासीन रही। अब बच्चे बड़ों को सिखाने का काम कर रहे है। बच्चें सरकारों से पूछ रहे है कि हमारे हिस्से की मिट्टी, पानी और हवा कहां चली गई। डा. जोशी ने कहा कि यह एक अनूठा प्रयास है। इटावा में इस कार्यक्रम के संयोजक डीएफ ओ कन्हैया पटेल, कैलाश यादव व संजय सक्सेना ने जो पहल की है वह दूर तक जाएगी। कार्यक्रम के संयोजक डीएफओ कन्हैया पटेल, प्रधानाचार्य कैलाश यादव व संजय सक्सेना ने अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
विशिष्ट अतिथि पीसीएस अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने कहा कि एक पीपल का पेड़ अपने जीवन काल में हमें 50 लाख रुपये की आक्सीजन देता है।
मुख्य विकास अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों को ये सिखाया जाए कि वह अपने जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं। कार्यक्रम में सेविन हिल्स की छात्रा पल्लवी ने स्पीकर की भूमिका निभाई। इस मौके पर सुदिति ग्लोबल के प्रधानाचार्य कमल कुमार, थियोसोफिकल के प्रधानाचार्य सुनील पांडेय, पुलिस माडर्न के प्रधानाचार्य अभिषेक सक्सेना, होली प्वाइंट भरथना के प्रधानाचार्य प्रदीप पांडेय और दो दर्जन स्कूलों के बच्चों ने भागीदारी की।