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Kanpur News: अब बकरियों का भी होगा कृत्रिम गर्भाधान

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इटावा। जिले में बड़ी संख्या में पशुपालक बकरियों का पालन करते हैं। जमुनापारी बकरियों के पालन में जिले का अहम स्थान है। बकरियों की नस्ल सुधारने, इनमें बीमारियां फैलने से रोकने के लिए जनपद में बकरियों का कृत्रिम गर्भाधान जल्द शुरू होने जा रहा है। इसके लिए जिले को प्रथम चरण का लक्ष्य भी आवंटित कर दिया गया है।
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अभी तक गाय और भैसों का ही कृत्रिम गर्भाधान होता था, लेकिन अब बकरियों का भी कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि अच्छी नस्ल और अधिक वजन के बकरे-बकरियां होंगे और उनमें मांस भी अधिक होगा। पहली बार जनपद में बकरियों के कृत्रिम गर्भाधान को लेकर चिकित्सकों की ट्रेनिंग कराई जाएगी।
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय है। कुछ ही वर्षों में बकरी पालन से अच्छी आय हो सकती है। पशुपालकों की आय बढ़ाने के मकसद से पशुपालन विभाग तमाम कवायद में जुटा है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इस समय करीब 70 हजार लोग ढाई लाख से अधिक बकरियों का पालन कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर जमुनापारी प्रजाति की बकरियां हैं।
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कृत्रिम गर्भाधान के फायदे
शासन की तरफ से बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम गर्भाधान योजना शुरू की गई है। इसके साथ बकरे से बकरियों में फैलने वाले रोगों में भी कमी आएगी। इनमें कई बीमारियां होती हैं, जिनमें मुख्यतः मोनियोसिस, ब्रूसेलोसिस, विब्रियो वल्निकस शामिल हैं। विभाग का मानना है कि कृत्रिम गर्भाधान से इन बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए जिले में 10 सेंटर खोले जाएंगे।

जिले में है प्रदेश का पहला भेड़-बकरी पशुपालन प्रशिक्षण केंद्र
जनपद में भेड़-बकरियों की अच्छी संख्या को देखते हुए बीते वर्ष शहर के बलराम सिंह चौराहे के पास प्रशिक्षण केंद्र खोला गया था। इस केंद्र पर लगभग 600 पशुपालक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये पशुपालक बकरी पालन की तमाम बारीकियों को सीखकर उनका उपयोग कर रहे हैं।


यह होगी प्रक्रिया
कृत्रिम गर्भाधान के लिए पशुपालक को विभाग के केंद्र पर बकरी ले जानी हाेगी। साथ में मोबाइल नंबर व आधार कार्ड ले जाना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद दो बार मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, उसके बाद पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होगी। तब बकरी का कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से निशुल्क रहेगी।


बोले पशुपालक
चकरनगर के पशुपालक रामजीलाल कुमार ने बताया कि विभाग की यह योजना काफी लाभदायक सिद्ध होगी। हालांकि इस प्रक्रिया का सफल होना अपने आप में कड़ी चुनौती है।
महेवा निवासी पशुपालक रामपाल का कहना है कि बकरियों के कृत्रिम गर्भाधान से अच्छी प्रजाति का जन्म होगा। इससे पशुपालकों की आय बढ़ेगी। बकरी पालन को भी बढ़ावा मिलेगा।


जनपद को पहले चरण में 350 बकरियों के कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य दिया गया है। कृत्रिम गर्भाधान के बाद बकरियां उन्नत नस्ल के बकरे और बकरियां पैदा करेंगी। दूध उत्पादन भी बढ़ेगा और बकरियों में होने वाली बीमारियां भी न के बराबर होंगी। इससे बकरी पालकों की आय बढ़ेगी।
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- डॉ. मनोज गुप्ता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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