नोट बैन से दलहनी व तिलहनी फसलों को भी ग्रहण लगा है। किसानों को पैसे के अभाव में खाद-बीज न मिलने से बुंदेलखंड में करीब 60 फीसदी फसल नहीं बोई जा सकी। कुछ किसानों ने भरपाई के लिए गेहूं बो दिया है। हालांकि इस वर्ष मौसम माकूल रहा लेकिन खाद-बीज की कमी खेती में आड़े आ गया।
उधर, पिछले कई सालों से दैवी आपदाओं से दलहनी फसलें नहीं हो पाई थीं। इस वर्ष बारिश ठीक-ठाक होने और मौसम माकूल रहने से किसानों की मंशा ज्यादा से ज्यादा दलहनी और तिलहनी फसल बोने की थी लेकिन ऐन बुवाई के वक्त नोट बैन लग गया। किसान खेत छोड़कर बैंकों से पैसा निकालने के लिए दिन-दिन भर लाइन लगाने लगे। इसके बाद भी उन्हें खाद-बीज के लिए पैसा नहीं मिल रहा। ऐसे में चित्रकूटधाम मंडल में लगभग 60 फीसदी दलहनी, तिलहनी फसल नहीं बोई जा सकी। चित्रकूटधाम मंडल में इस साल 9,46,441 हेक्टेयर में रबी फसल की बुआई का लक्ष्य था।
इस वर्ष सबसे ज्यादा 3,91,233 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। दलहनी फसलों के लिए 4,76,900 हेक्टेयर का लक्ष्य था। इसी तरह तिलहन में 88,401 हेक्टेयर में राई व सरसों बोई गई है। 15,828 हेक्टेयर में अलसी और 4428 हेक्टेयर में तोरिया की बुआई हुई है। चना 2,81,070 हेक्टेयर के मुकाबले मात्र 1.41 लाख हेक्टेयर में ही बोया गया है। मसूर 1,48,454 हेक्टेयर के मुकाबले 98,389 हेक्टेयर में बोई गई है।