नोटबंदी का असर सीएम के गांव सैफई में भी दिख रहा है। किसान, मजदूर बेहाल हैं। मजदूरों के पास फुटकर रुपये न होने से चूल्हा जलना मुश्किल होने लगा है। किसानों के खेत वीरान पड़े हैं। सैफई के जाने-माने मिनी पीजीआई में लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर फुटकर के नाम पर 500 का नोट 400 व 1000 के नोट के 850 रुपये में लिए जा रहे हैं।
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दुकानदार किसानों को पुराने 500 के नोट में सिर्फ 450 रुपये का ही सौदा दे रहे हैं। रुपये न होने से परेशान किसान फुटकर के लिए घर के जेवर गिरवी रख रहे हैं। सैफई का बाजार पूरी तरह ठंडा पड़ा है। यहां के छोटे बड़े दुकानदारों की मानें तो बिक्री घटकर 30 प्रतिशत रह गई है।
अस्पताल कर्मचारी ही झटक रहे नोट
भाई मुकेश का मिनी पीजीआई में इलाज करा रहे बंटी गुरुवार दोपहर अस्पताल के पार्क में परिजनों के साथ भोजन कर रहे थे। जब उनसे नोट बंदी पर बात की गई तो वह अपना और अस्पताल के अन्य मरीजों का दर्द बताने लगे। बंटी का कहना है कि अस्पताल के काउंटर पर हजार-पांच सो का नोट चल तो रहा है, लेकिन कम पैसों की दवाई लेने पर पूरा नोट जमा करना पड़ता है। चोरी-छुपे तीमारदारों से फुटकर देने के नाम पर 1000 के नोट के 850 रुपये और 500 के नोट पर 400 रुपये दे रहे हैं।
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दो हजार दिए फिर भी नहीं मिली दवा
औरैया जनपद के ग्राम अरियारी अछल्दा निवासी गुड्डी देवी पिछले कई दिनों से पीजीआई में भर्ती रहकर दिमागी बुखार का इलाज करा रही हैं। गुरुवार को छुट्टी मिलने पर वह दोपहर को अस्पताल से बाहर निकलीं तो आपबीती बताते हुए बोलीं, एक दिन पहने परिजनों के पैसे खत्म हो गए। जैसे तैसे गांव से पैसे मंगाए। एक दो हजार का नोट आया, लेकिन जब उससे दवाई लेने पहुंचे तो फुटकर न होने पर पूरा नोट जमा करने को कहा गया। दवाई नहीं ली और नोट को लेकर परिजन सैफई बाजार में गए। वहां भी किसी ने नोट नहीं लिया। परिवारीजन नोट लेकर इटावा शहर गए और जरूरत न होने पर भी एक दुकानदार से मिठाई खरीदी। इसके बाद खुले पैसे मिले।
फुटकर के लिए जेवर रखने को तैयार
नोटों के लिये परेशान हैं लोग
साइकिल पर बच्चे को बैठाकर आ रहे सैफई गांव के खंड एक निवासी सूबेदार सिंह को रोककर जब उनसे नोटबंदी पर पूछा तो उन्होंने अपना रोना रोते हुए बताया कि नोटबंदी ने किसानों और गरीबों का बुरा हाल कर दिया है। हजार-पांच सौ के नोट चलन से बाहर किए जाने से वह खाद नहीं खरीद पा रहे हैं। गेहूं की बुवाई में देरी होती जा रही है। माह के अंतिम सप्ताह तक बुवाई हो जानी चाहिए। अब उनके सामने सिर्फ एक ही तरीका है कि गांव के किसी व्यक्ति के पास जेवर गिरवी रखकर नए दो हजार के नोट या फिर 100-100 के नोट लाकर बाजार से बीज और खाद खरीदकर लाएं।
2000 का नोट व सिक्के काम नहीं आ रहे
कुछ दूर सैफई के अंदर मिठ्ठनपुर की ओर चलने पर रास्ते में ही बाइक से रिटायर्ड फौजी जयवीर सिंह आते दिखाई दिए। उनसे अभी सवाल ही किया ही गया था कि जयवीर सिंह ने अपने हाथ पैंट की जेब में डाले और एक हाथ में 5-5 रुपये के सिक्के और दूसरे में 2000 का नोट निकालकर सामने करते हुए कहा कि ये दोनों ही कहने को तो देश की नई मुद्रा हैं लेकिन अभी उनके किसी काम की नहीं। 100-200 रुपये के सामान लेने पर न तो दुकानदार दो हजार का नोट ले रहा है और न ही 5-5 के सिक्के। बैंक में घंटों लाइन लगाने के बाद बस यही मिल रहा है।
जुताई और पलेवा के लिए भी नहीं पैसे
किसानों को हो रहीं ये परेशानियां
सड़क किनारे खेत में मौजूद किसान श्यामदास ने बताया कि नोट बंद होने के बाद किसानों का बहुत ही बुरा हाल है। बीज खाद की तो बात दूर, पैसा न होने के कारण अभी तक वह अपने खेत की जुताई और पलेवा नहीं कर पाए हैं। घर में खाने पीने के लिए भी पैसों के लाले पड़ रहे हैं। बड़े नोटों क ी बंदी की वजह से छोटे नोट भी नहीं मिल रहे हैं। जिससे गेहूं की बुवाई लगातार पिछड़ती जा रही है।
दुकानदारी घटकर हो गई है आधी
सैफई चौराहा बाजार में राजू स्वीट हाउस के कारीगर भगवानदास ने बताया कि नोट बंदी के बाद से निरंतर दुकान की बिक्री घट रही है। पहले दिन में चार हजार तक दुकानदारी हो जाती थी। अब हजार से 15 सौ रुपये की ही दुकानदारी है। नोटबंदी का फैसला बुरा नहीं है, लेकिन सरकार को नोट बंद करने से पहले कुछ ऐसा करना चाहिए था कि गरीब और किसानों पर इसके विपरीत प्रभाव न पड़े। अभी भी सरकार जल्द से जल्द पांच सौ का नोट बाजार में उतारकर उनकी मुश्किलों को आसान कर सकती है।
सीएम के गांव के सब्जी विक्रेता मनोज कुमार ने कई परेशानियों की बात कहने के बाद भी सरकार के फैसले को उचित बताया। उन्होंने कहा पता है कि कोई भी नया काम होने पर दिक्कतें आती हैं और बाद में सब सामान्य हो जाता है। यही बात नोटबंदी पर भी लागू है। हालांकि वर्तमान में नोट बंद होने के बाद से न तो वह पूरी सब्जी खरीद पा रहे हैं और न ही दुकानदारी ही ठीक से हो रही है। बैंक से दो हजार का नोट मिल रहा है। जिसे तोड़ने वाला ढूंढने पर भी नहीं मिल रहा है।
लेने आए थे नोट, थमा दी सिक्कों की थैली
सैफई की स्टेट बैंक शाखा पर दोपहर दो बजकर 45 मिनट पर बैंक का चैनल बंद था और बाहर लंबी लाइन लगी थी। बैंक के अंदर लगी लाइन के लोगों को रुपये दिए जा रहे थे। बैंक के अंदर से बाहर निकले छात्र निखिल ने अपने हाथों में पकड़ी दस के सिक्कों की थैली दिखाते हुए कहा कि वह बैंक में नोट लेने आया था, लेकिन बैंक ने 10-10 के सिक्के की दो थैलियां थमा दी। उसे गैस सिलेंडर लेने जाना है। पता नहीं इस पैसे से उसे सिलेंडर मिलेगा या नहीं।
अब तो आटा-दाल के भी लाले
पीजीआई सैफई के ठीक सामने स्थित बैंक के बाहर लाइन में लगे किसान सियाराम से जब बातचीत की गई तो जेब में रखे पुराने हजार और पांच सौ के नोट दिखाते हुए कहा घर में आटा-दाल के लाले पड़ गए हैं और बैंक में नोट नहीं बदल पा रहे हैं। दूसरी ओर अब दुकानदार भी उधार सामान देने से मना करने लगे हैं। वह उधारी मांगने पर पिछले 10 दिनों में बहुत अधिक उधारी हो जाने की बात कहकर मुंह फेर ले रहे हैं। ऐसे में उनके सामने आधा व दाल का संकट है।