शांति और सद्भाव की आशा यात्रा के शहर पहुंचते ही पुरवामीर से सरसौल तक आठ किमी मानव शृंखला बनाए खड़े बच्चों ने फूल बरसाते हुए भारत माता की जय का नारा बुलंद किया।
आशा यात्रा लेकर चल रहे आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक श्री एम ने पुरवामीर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी धर्म में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। सभी धर्मों का सार शांति है।
कन्या कुमारी से कश्मीर तक के लिए निकली आशा यात्रा गुरुवार को सुबह 10 बजे कानपुर नगर की सीमा पुरवामीर पहुंची। वहां पूर्व माध्यमिक विद्यालय में श्री एम ने अपनी बात सर्वे भवन्तु सुखिन: श्लोक के साथ शुरू की तो भारत माता की जय के नारे लगने लगे।
श्री एम ने कहा कि भारत की संस्कृति में शांति का पौधा विद्यमान है जो समय-समय पर शांति का संदेश देता रहता है। आशा यात्रा 12 जनवरी 2015 को कन्या कुमारी से शुरू हुई थी। अभी तक विभिन्न प्रांतों में पांच हजार किमी की यात्रा पूरी हो चुकी है। मई में कश्मीर पहुंचकर लाल चौक पर तिरंगा फहराने के साथ यह संपन्न होगी।
इस यात्रा का उद्देश्य सभी को जोड़ना है। भारत एक गुलशन है। इसमें सभी तरह के फूल हैं। जब ये फूल महकेंगे तभी वातावरण में खुशबू बहेगी। श्री एम के साथ चल रहे कर्नाटक के पूर्व डीजीपी अजय कुमार ने कहा कि यह यात्रा सभी धर्मों के बीच भाईचारा बनाए रखने का संदेश दे रही है।
इसके पहले जिलाधिकारी कौशलराज, एसएसपी शलभ माथुर, एडीएम सिटी अविनाश सिंह, एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह, सीएमओ आरपी यादव, आईटीबीपी के सूबेदार मेजर शिव प्रकाश साहू, अमरजीत सिंह पम्मी समेत अन्य अफसरों ने यात्रा का स्वागत किया। यात्रा ने रूमा में रात्रि विश्राम किया।