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Nikay Chunav: कानपुर में निकाय चुनाव के आरक्षण के तीर से भाजपा का लोकसभा चुनाव पर निशाना

Wed, 07 Dec 2022 12:28 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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निकाय चुनाव - फोटो : सोशल मीडिया
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निकाय चुनाव के लिए इस बार जिस तरह से महापौर, नगर पंचायत चेयरमैन व नगर पालिका अध्यक्षों की सीट का आरक्षण जारी किया गया है, उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा का पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर है। निकाय चुनाव के जरिये पार्टी ऐसा जातीय गणित बैठाना चाहती है, जिससे लोकसभा चुनाव के दौरान दांवपेंच की जरूरत ही न पड़े।

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महापौर सीट सामान्य कोटे में लाकर फिर से शहर के सवर्ण मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कोशिश सरकार की ओर से की गई है। इसी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की ज्यादातर सीटों को पिछड़ा, अति पिछड़ा और अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा गया है। कहा जा रहा है कि शहरी क्षेत्रों में भाजपा का वोट बैंक हमेशा से बाकी पार्टी से बेहतर रहा है।

इसमें सामान्य श्रेणी के मतदाताओं की संख्या ज्यादा रहती है। ग्रामीण क्षेत्राें में पालिका और नगर पंचायतों में आरक्षण की स्थिति शहर से बिल्कुल उलट है। महानगर क्षेत्र में आने वाले दो नगर पालिकाओं घाटमपुर सीट अन्य पिछड़ा वर्ग और बिल्हौर नगर पालिका सामान्य श्रेणी को दी गई है।
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इसके अलावा महानगर क्षेत्र में आने वाले दो नगर पंचायतों बिठूर में पहले की तरह महिला और शिवराजपुर अन्य पिछड़ा महिला के खाते में गई है। स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों मेें बिठूर को छोड़कर बाकी सीटों पर निर्दलीय व दूसरे दलों की स्थिति ज्यादा मजबूत है। यही वजह है कि पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार विपक्षियों का सफाया करने की योजना पर काम कर रही है।

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