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पीएम और शाह की नेतृत्व क्षमता ने जीता संघ का दिल, लखनऊ में होने वाली बैठक उड़ा सकती विपक्ष की नींद

Wed, 19 Jun 2019 02:50 PM IST
शिखा पांडेय पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अध्यक्ष अमित शाह, मोहन भागवत
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लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार बड़ी जीत हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नेतृत्व क्षमता को लेकर संघ अब पूरी तरह आश्वस्त हो चुका है। चर्चा है कि अब संघ आने वाले समय के लिए मोदी और अमित शाह जैसी क्षमता वाले कार्यकर्ता तैयार करने में जुट गया है। संघ का मानना है कि देश को विश्व गुरु बनाने के लिए अगले 25 वर्षों तक केंद्र में ऐसे ही नेतृत्व वाली सरकार का होना आवश्यक है।
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पिछले करीब एक महीने से देश केअलग-अलग स्थानों पर चल रहे संघ के कार्यक्रमों में आरएसएस के उच्च नेतृत्व की तरफ से इस तरह के संकेत कई बार दिए जा चुके हैं। इसी कड़ी में 29 जून को पहली बार कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र स्थित झांसी में संघ प्रमुख मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारियों का योजन वर्ग लगने जा रहा है। इसमें यूपी के सभी प्रांतों के संघ पदाधिकारी शामिल होंगे।

27 से तीन दिन तक लखनऊ में संघ की एक विशेष बैठक

इस वर्ग में संघ की आगामी योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाएगा। योजन वर्ग तीन जुलाई तक चलेगा। संघ का योजन वर्ग अभी तक नागपुर (संघ मुख्यालय) में आयोजित किया जाता रहा है। पहली बार यह झांसी में होने जा रहा है।

इससे साफ है कि संघ को उत्तर भारत से ज्यादा उम्मीदें हैं। मोदी और अमित शाह भी उत्तर भारत से ही आते हैं। इस बीच पता चला है कि इससे पहले 27 से तीन दिन तक संघ की एक विशेष बैठक लखनऊ में होने जा रही है।
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इस तरह से चल रहा अभियान

इस बार जितने भी संघ के प्रशिक्षण वर्ग हुए हैं, सभी में नए लोगों को संघ से जोड़ने की कवायद पर बात हुई है। युवाओं को विशेष रूप से नेतृत्व कर्ता के रूप में तैयार करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई है। यह मान लिया गया है कि संघ से निकलकर जो देश की राजनीति में आगे बढ़ेगा, वह बेहतर नेतृत्व कर्ता हो सकता है। इसके लिए नरेंद्र मोदी को उदाहरण के तौर पर सामने रखा जा रहा है।

इस तरह से चल रहा अभियान
मेडिकल, इंजीनियरिंग, डॉक्टर, उद्यमी, बिजनेसमैन, खिलाड़ी, वैज्ञानिक समेत कई क्षेत्रों में जो भी लोग हैं, उन सभी को संघ से जोड़ने पर काम शुरू हो गया है। पहले यह सब खामोशी के साथ और थोड़े से क्षेत्र में होता था, अब यह खुले तौर पर बड़े क्षेत्र में और विस्तृत तरीकेसे किया जाने लगा है।
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