कानपुर के समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष महताब आलम और उनके कारोबारी भाई टेनरी संचालक इरशाद आलम 31 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में फंस गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने इलाहाबाद बैंक की मुख्य शाखा से लिए गए 31 करोड़ रुपये लोन की रकम न चुकाने के मामले में अदालत में चार्जशाीट दाखिल कर दी है। दोनों भाई संयुक्त रूप से आरोपी बनाए गए हैं। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महताब आलम का जाजमऊ स्थित पेट्रोल पंप भी सीज कर दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट के मुताबिक महताब आलम के भाई इरशाद आलम ने वर्ष 2004 से 2006 के बीच अपनी दो कंपनियों हामिद लेदर फिनिशर्स और हामिद सन एक्सपोर्ट के नाम से इलाहाबाद बैंक की मुख्य शाखा से 31 करोड़ रुपये का लोन लिया था। बाद में उनके खाते एनपीए हो गए थे।
प्रवर्तन निदेशालय ने इरशाद आलम और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों को खंगाला गया तो पता चला कि उन्होंने एक्सपोर्ट के नाम पर ली गई अधिकांश रकम महताब आलम को दी थी। इसका इस्तेमाल फिल्म, रियल एस्टेट व राजनीति में किया गया। इसमें से 18 करोड़ रुपये मुंबई की मशरेक कम्यूनिकेशन के बैनर तले बनने वाली फिल्म ताजमहल में निवेश किया था।
सीबीआई की चार्जशीट में बच गए थे
इलाहाबाद बैंक की शिकायत पर सबसे पहले सीबीआई ने वर्ष 2012 में केस दर्ज किया था। सीबीआई ने इरशाद आलम को आरोपी पाते हुए चार्जशीट लगाई थी, लेकिन महताब आलम को आरोपी नहीं बनाया था। चूंकि मामला 10 करोड़ रुपये से अधिक का था। इस लिहाज से वर्ष 2014 में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच शुरू की थी।
ऐसे करते थे गोलमाल
इरशाद आलम ने लंबे समय तक निर्यात किए जाने वाले चमड़े के उत्पादों के मूल्य और संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया। बैलेंस शीट व टर्नओवर कागजातों में मजबूत हुआ। इस आधार पर इलाहाबाद बैंक से करीब 30 करोड़ रुपये का लोन लिया। यह पैसा बैंक को वापस नहीं किया गया। उधर निर्यातकों को मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉ-बैक सुविधा का भरपूर लाभ लिया। इसमें विभाग को करीब 5 करोड़ रुपये का चूना लगा। निर्यात में इस्तेमाल होने वाले आयातित उत्पादों में भी कस्टम ड्यूटी से छूट के लिए मिलने वाले इंपोर्ट लाइसेंस का भी गलत इस्तेमाल किया। कस्टम ड्यूटी से मुक्त जो माल विदेशों से मंगाया गया उसे स्थानीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा गया।
जानिए इरशाद और महताब को
महताब आलम फिलहाल शिवपाल सिंह यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं। फरवरी 2017 में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष थे। तब जाजमऊ स्थित निर्माणाधीन इमारत के ढह जाने से 10 मजदूरों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद डेढ़ साल तक फरार रहे। उनके आवास की कुर्की भी हुई। बाद में सपा ने महताब से दूरी बना ली तो उन्होंने प्रसपा का दामन थाम लिया। इनके भाई इरशाद आलम का कच्चा चमड़ा और तैयार चमड़ा (फिनिश्ड लेदर) का बड़ा काम है। कई देशों में इनका निर्यात होता है। इनका सालाना टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये का है। इरशाद ताजमहल फिल्म के निर्माता के तौर पर भी जाने जाते हैं।