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आजादी के बाद से कानपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने सात बार जीत हासिल की, भाजपा का रहा ये हाल

Mon, 11 Mar 2019 05:24 PM IST
शिखा पांडेय हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर सेंट्रल - फोटो : अमर उजाला
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गंगा किनारे बसे औद्योगिक शहर कानपुर के वोटरों का मिजाज हमेशा से अलग रहा है, तभी तो घोर कांग्रेसी लहर में भी निर्दलीय प्रत्याशी मजदूर नेता एसएम बनर्जी को वोटरों ने चुनकर लोकसभा पहुंचाया था। तीन बार भाजपा के जगतवीर सिंह द्रोण, तो तीन ही बार कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को यहां के वोटर कानपुर का प्रतिनिधित्व करने का मौका दे चुके हैं। आजादी के बाद से कानपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने सात बार जीत हासिल की है, तो भाजपा ने चार बार।
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आजादी के बाद से अब तक कानपुर संसदीय सीट पर 17 बार चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस इस सीट पर सर्वाधिक सात बार जीत का परचम लहरा चुकी है। यहां से कम्युनिस्ट पार्टी भी एक बार चुनाव जीत चुकी है। पहला लोकसभा चुनाव सन् 1952 में हुआ था। चुनाव में कांग्रेस के हरिहरनाथ शास्त्री ने जीत दर्ज की थी। विमान दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर उपचुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस के शिवनारायण टंडन जीते।

उन्होंने बीच में ही लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, तो प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के राजाराम शास्त्री को यहां की जनता ने चुनकर लोकसभा पहुंचाया। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। परंतु, सन् 1957 में जब लोकसभा चुनाव हुआ, तो यहां के वोटरों ने निर्दलीय प्रत्याशी एसएम बनर्जी को चुनकर लोकसभा भेजा। इसके बाद वह तीन और बार यहां से सांसद रहे।

इसके बाद सन् 1977 में जनता पार्टी से मनोहर लाल ने जीत हासिल की। सन् 1980 में कांग्रेस के आरिफ मोहम्मद खां ने जीत हासिल करते हुए कांग्रेस की वापसी शहर में कराई, लेकिन 9 साल बाद 1989 में फिर से कांग्रेस के हाथ से यह सीट निकल गई और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सुभाषनी अली यहां से सांसद बनीं।

राम मंदिर आंदोलन ने दिया बल
सन् 1990 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली। इसके साथ ही राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू हो गया।  राम मंदिर आंदोलन के दौरान बीजेपी ने कानपुर सीट पर अपना कब्जा जमाया। सन् 1991 में जगतवीर सिंह द्रोण ने पहली बार यहां से भाजपा का परचम लहराया। इसके बाद भाजपा 1996 और 1998 में भी यह सीट जीतने में कामयाब रही।

कांग्रेस ने 1999 लोकसभा चुनाव में श्रीप्रकाश जायसवाल को उतारकर बीजेपी के मजबूत गढ़ को भेदने में सफलता हासिल की। श्रीप्रकाश 2004 और 2009 में भी यहां से जीतने में कामयाब रहे और हैट्रिक पारी खेली, लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर में बीजेपी का इस सीट पर फिर से कब्जा हो गया और कानपुर लोकसभा सीट से डॉ. मुरली मनोहर जोशी सांसद चुने गए। उन्होंने कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को 2,22, 946 वोटों से शिकस्त दी थी। 
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आंकड़े
- जनसंख्या : 22,26,317 (2011 के जनगणना के मुताबिक)
- 2014 में पड़े वोट : 835125
- पुरुष : 55.2 प्रतिशत, महिला : 44.8 प्रतिशत
- पोलिंग स्टेशन : 1492

2014 में टॉप-5 में रहीं ये राजनीतिक पार्टियां
- भारतीय जनता पार्टी : 56.85
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस : 30.15
- बहुजन समाज पार्टी : 6.37
- समाजवादी पार्टी : 3.08
- अन्य : 59.21

सपा-बीजेपी का 50-50
कानपुर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सीसामऊ और आर्यनगर विधानसभा सीट सपा के खाते में है। गोविंद नगर और किदवई नगर सीट भाजपा की झोली में है। वहीं, छावनी सीट पर कांग्रेस काबिज है।
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