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बढ़ सकती है प्रत्याशियों की मुसीबत, जानें क्या है चुनावी भुगतान में जीएसटी विभाग का ये सख्त नियम

Tue, 19 Mar 2019 03:58 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक फोटो
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प्रत्याशियों को अपने चुनावी खर्च दर्शाने में जीएसटी आधारित बिल लगाने पड़ेंगे। बिना जीएसटी नंबर वाले बिल को मान्यता नहीं दी जाएगी। जिस बिल पर जीएसटी नंबर नहीं होगा उसे कच्चा बिल माना जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रत्याशी और बिल देने वाला डीलर दोनों ही परेशानी में आ सकते हैं। स्टेट जीएसटी विभाग इसी को आधार बनाकर डीलर की फर्म पर सर्वे कर सकते हैं। 
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दरअसल चुनाव आयोग ने प्रत्येक प्रत्याशी को चुनावी खर्च के लिए 70 लाख रुपये की सीमा निर्धारित कर रखी है। सेवाओं और वस्तुओं की खरीद में यह रकम कहीं न कहीं खर्च होगी। ऐसे में महत्वपूर्ण यह है कि जहां रकम खर्च की गई उसका बिल विधिवत हो।

हालांकि यह हिदायत प्रत्याशियों को दी जा चुकी है, लेकिन स्टेट जीएसटी के अफसरों को भी सचेत रहने को कहा गया है कि वे प्रत्याशी की ओर से लगाए गए बिलों का अध्ययन करते रहें। जहां जैसी जरूरत पड़े, वैसे कदम उठाए जाएं। 
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निर्वाचन से मुक्त रहेंगी सचल दल इकाइयां 
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्टेट जीएसटी की सचल दल और विशेष अनुसंधान शाखा के अधिकारियों, कर्मचारियों और वाहनों को निर्वाचन कार्यों से मुक्त रखा है। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरबिंद कुमार पांडेय ने इस आशय का आदेश जारी किया। निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि विभाग की सचल दल इकाइयोें को चुनाव संबंधी जांच में इस्तेमाल किया जाएगा। 
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