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लखनऊ से कानपुर के बीच शुरू हुई इलेक्ट्रिक एसी बसों को झटका, आवाजाही बंद

Tue, 26 Mar 2019 01:21 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक फोटो
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बिना प्रदूषण फैलाए कानपुर से लखनऊ के बीच यात्रियों को लाने ले जाने वाली इलेक्ट्रिक एसी बसें यात्रियों को रास नहीं आई। पिछले साल 21 अगस्त को शुरू हुई यह बस सेवा छह महीने भी नहीं चल सकी। अब उसकी आवाजाही बंद कर दी गई है।
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इसका कारण महंगा किराया और धीमी गति बताया गया। जब यह बस चली थी तो लोगों में बस को लेकर उत्साह था लेकिन परफारमेंस उन्हें पसंद नहीं आया। चार महीने अनियमित रूप से चलने के बाद दिसंबर से यह बस सेवा बंद चल रही है।
 

कम स्पीड और जनरथ का सस्ता किराया बना वजह
इलेक्ट्रिक एसी बस सेवा के विफल होने केपीछे सबसे बड़ी वजह जनरथ एसी बस का सस्ता किराया और धीमी स्पीड थी। कानपुर से लखनऊ के बीच चलने वाली एसी बसों मे सबसे सस्ता किराया जनरथ सेवा का है। लखनऊ-कानपुर का किराया 137 रुपये है। वॉल्वो बस का किराया 250 रुपये, स्कैनिया (ट्रैवलर एसी बस) का किराया 276 रुपये है। जबकि नॉन एसी जनरल बस का किराया 105 रुपये है।

वहीं, इलेक्ट्रिक एसी बस का किराया 227 रुपये था। इलेक्ट्रिक बस की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित थी लेकिन भीड़ की वजह से 60 से 70 ही अधिकतम औसत स्पीड रही। इससे कानपुर से लखनऊ के बीच आने जाने में बस को ढाई से तीन घंटे लगते थे। जबकि एसी और नॉन एसी बस महज डेढ़ से दो घंटे में पहुंच जाती थीं। अगर किराया कम कर दिया जाता तो इस बस को नियमित रूप से चलाया जा सकता था।

ऐसी थी इलेक्ट्रिक बस
एसी इलेक्ट्रिक बस में 6000  वोल्ट की छह बैटरियां थीं।  नॉन एसी बस में चार बैटरियां थीं। पहने एक महीने के लिए नॉन एसी बस चली थी।  साढ़े तीन घंटे में फुल चार्ज होने वाली यह बस एक बार में फुल चार्ज होने पर 300 किमी आ जा सकती थी। यह बस लखनऊ से सुबह सात बजे और दोपहर तीन बजे चलती थी। कानपुर पहुंचने का समय सुबह नौ और शाम पांच बजे का था और आधे घंटे बाद रवाना होती है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए थी बेहतर
यह बस स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बेहतर थी। डीजल से न चलने की वजह से धुआं नहीं उठता था। बस के भीतर डीजल की दुर्गंध से कुछ लोगों को होने वाली उल्टी की समस्या नहीं होती थी। खासकर बीमार व्यक्ति और डीजल केधुएं से एलर्जी वाले लोग इस बस में यात्रा करते थे। इससे हवा में जहरीली गैसें भी नहीं घुलती थीं।
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‘फिलहाल लखनऊ से अब इलेक्ट्रिक एसी बसें नहीं आ रही हैं। इसमें यात्रियों की संख्या कम थी लेकिन कुछ लोगों के लिए यह बस मुफीद थी। कुछ लोग इसका इंतजार करते थे लेकिन जनरथ एसी बस सस्ती थी। पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य दोनों के लिए मुफीद थी। कोशिश होगी कि यह बस सेवा जारी रहे।’
- अतुल जैन, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम


एक नजर इस पर भी
- 227 रुपये था लखनऊ तक का किराया
- दो घंटे समय था लेकिन ढाई घंटे में पहुंचाती थी
- जनरथ एसी बस का किराया 137 रुपये
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