कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के विशेषज्ञों ने सॉलिड ऑक्साइड फ्यूल सेल (एसओएफसी) विकसित कर स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा काम किया है। यह बैटरी की तरह घर और वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसमें कार्बन डाइऑक्साइड और दूसरी नुकसानदेह गैसों का उत्सर्जन नहीं होता है। यह हाइड्रोजन के अलावा प्राकृतिक गैस, अमोनिया, प्रोपेन, इथेनॉल और पानी के मिश्रण जैसे कई ईंधन पर कार्य कर सकता है। शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया जा चुका है। यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) के मेटेरियल साइंस एंड मेटलर्जिकल साइंसेस विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अल्का गुप्ता ने सॉलिड ऑक्साइड फ्यूल सेल (एसओएफसी) विकसित किया है। यह उच्च दक्षता के साथ विद्युत उत्पादन के साथ विभिन्न फ्यूल्स पर काम करने की क्षमता रखता है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि हाइड्रोजन के अलावा प्राकृतिक गैस, अमोनिया, प्रोपेन, इथेनॉल और पानी के मिश्रण जैसे कई ईंधन पर कार्य कर सकता है।
यदि एसओएफसी में आणवित हाइड्रोजन का उपयोग किया जाए तो यह प्रक्रिया लगभग प्रदूषण मुक्त होगी। इसमें विद्युत रासायनिक रूपांतरण डायरेक्ट होता है, जिससे प्रदूषण न के बराबर होता है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि एसओएफसी विकसित करने में चार वर्ष लगा है। इसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया। साथ ही साइंटिफिक कांफ्रेंस में भी प्रस्तुत किया जा चुका है।