दावेदारों ने सोशल मीडिया में प्रचार तो लगभग एक साल पहले शुरू कर दिया था। चुनाव नजदीक आते ही इसे और धारदार कर दिया गया है। अब प्रोफेशनल सोशल मीडिया हैंडलर की तलाश शुरू हो गई है।
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच हो रहे विधानसभा चुनाव में इस बार सोशल मीडिया प्रचार का सशक्त माध्यम बनेगा। भाजपा, सपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों की तरफ से सभी सीटों पर प्रत्याशियों का एलान भले न किया गया हो, लेकिन दावेदारों में अभी से अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए वर्चुअल माध्यमों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
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इसके लिए दावेदारों ने बाकायदा सोशल मीडिया पर प्रचार में दक्ष युवाओं की टीम और पीआर (जनसंपर्क) एजेंसियों को मोटा खर्च देकर अधिकृत किया जा रहा है। साथ ही परिवार के पढ़ेलिखे युवाओं को भी इस काम में लगाया है। इन्हें स्पष्ट निर्देश है कि हर पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर और लाइक कराया जाए।
यही नहीं, उनके समर्थन में अधिक से अधिक कमेंट भी आएं। आप भी जानिये सोशल मीडिया पर कैसे होता है प्रचार...
सोशल मीडिया में प्रचार के लिए आपके ज्यादा मित्र होना आवश्यक नहीं हैं। पेड बूस्ट (पैसे देकर पोस्ट का अधिक से अधिक प्रसार करना) के सहारे जनता के सोशल मीडिया अकाउंट पर आपका दखल बढ़ने लगेगा। इसके लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम में पेज बनाकर प्रचार किया जाता है।
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पेज बनने के बाद भले ही आपके फॉलोअर न हों, लेकिन कुछ रकम अदा करने के बाद किया गया पोस्ट आप जिस वर्ग को चाहेंगे, उसके सोशल मीडिया अकाउंट में दिखने लगेगा। पेड बूस्ट करते समय आपको स्थान, आयु, पेशा, कितनों तक पोस्ट पहुंचानी है और कितने समय के लिए पोस्ट को बूस्ट करना है समेत कई विकल्पों को चुनना होता है। समयसीमा और जनता की संख्या के अनुसार बूस्ट की कीमत तय होती है। कम से कम कीमत का पोस्ट दो सौ रुपये का है।
न्यूनतम पैकेज एक लाख का
दावेदारों ने सोशल मीडिया में प्रचार तो लगभग एक साल पहले शुरू कर दिया था। चुनाव नजदीक आते ही इसे और धारदार कर दिया गया है। अब प्रोफेशनल सोशल मीडिया हैंडलर की तलाश शुरू हो गई है। ऐसे में कुछ पीआर एजेंसियां अलग-अलग पैकेज लेकर नेताओं के सामने हैं।
ये नेता की मांग के अनुसार पैकेज की रकम और सुविधाओं में कमीबेशी बता रही हैं। कंपनियों के पैकेज में वेब डिजाइनर, एडिटर, ग्राफिक्स डिजाइनर, फोटोग्राफर और सोशल मीडिया हैंडलर शामिल हैं। पीआर एजेंसियों का न्यूनतम पैकेज एक लाख रुपये का है। हालांकि, इतने में नेता जी की नैया पार नहीं हो पाएगी।
ऐसे में नेता जी तीन से पांच लाख रुपये के पैकेज ले रहे हैं। इस बीच, कुछ नेता खुद की आईटी सेल बनाकर फोटोग्राफर, डिजाइनर और सोशल मीडिया हैंडलर की भर्ती कर रहे हैं। आईटी सेल के मुखिया के रूप में प्रभावी लेख लिखने वाले युवाओं को मौका दिया जा रहा है।
दावेदारों और पार्टियों की मांग
सोशल मीडिया हैंडलर गौरव शुक्ला के अनुसार, इस बार चुनाव में दावेदारों ने वर्चुअल प्रचार, मतदाताओं का फीडबैक, वार्ड और ब्लॉक स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाने, बल्क व्हाट्सएप मैसेज भेजने, ऑफलाइन प्रचार संबंधी एप और सॉफ्टवेयर की मांग ज्यादा है। वहीं पार्टियों की तरफ से ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए टेंपलेट डिजाइनिंग, प्रभावी प्रचार के लिए वीडियो क्रिएशन, फेसबुक लाइव एटिडिंग और मिस्ड कॉल नंबर की सुविधा मांगी जा रही है।