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न खांसी आई, न बुखार, बस थकान लगती थी, कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके लोगों ने बताए खास लक्षण

Thu, 07 May 2020 08:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कोरोना से मुक्त हुए लोगों ने बताए खास लक्षण - फोटो : amar ujala
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कानपुर में कोरोना संक्रमण झेल चुके लोगों ने संक्रमण होने के बाद अचानक थकान आना एक खास लक्षण बताया है। उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि संक्रमण हो गया। बुखार, खांसी और जुकाम कुछ भी नहीं था लेकिन अचानक थकान लग रही थी। 
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इस पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। बीमारी जैसा कोई लक्षण ही नहीं था, वे समझ रहे थे कि थकान स्ट्रेस की वजह से है लेकिन जब जांच हुई तो कोरोना पॉजीटिव आ गए। हैलट अस्पताल से कोरोना निगेटिव होकर घर लौटे 20 लोगों से विभिन्न माध्यमों से अलग-अलग बात की गई।

उनसे पूछा गया कि जांच के पहले कौन सा खास लक्षण उभरा था? इस पर उन्होंने बताया कि थकान अधिक आ रही थी। यहां यह बताना जरूरी है कि अगर कोई हॉटस्पॉट क्षेत्र का शख्स है या फिर उसे किसी कोरोना रोगी के संपर्क में आने का संदेह है, या बाहर कहीं से लौटा है तो इस लक्षण को गंभीरता से ले।
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कोरोना पर जंग जीतने के बाद घर जाते लोग - फोटो : amar ujala
आम आदमी जिस पर ये शर्तें लागू नहीं होतीं उसे घबराने की जरूरत नहीं है। कुली बाजार, जाजमऊ, बेकनगंज और कर्नलगंज केे पॉजीटिव आए लोगों से अमर उजाला ने बात की है। बेकनगंज के रोगी ने बताया कि पहले उसे थकान आई, फिर हल्की हरारत सी लगी। शरीर का तापमान 99 डिग्री ही रहा। एहतियातन जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

कर्नलंगज के एक शख्स ने बताया कि उसे खांसी नहीं आ रही थी, गले में ठसका लग रहा था। बदन भारी सा महसूस हुआ है। संक्रमण किससे मिला? यह पता नहीं है। पांच लोगों को पहले हल्का नजला रहा है लेकिन इस बार के जुकाम में उन्हें थकावट अधिक आई। हैलट से ठीक होकर घर लौटे इन लोगों में किसी में भी कोरोना के निमोनिया जैसे लक्षण नहीं उभरे।

संक्रमण के बाद इसलिए आई थकान
नेशनल कॉलेज आफ चेस्ट फिजिशियंस इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसके कटियार का कहना है कि वायरस जब शरीर के अंदर जाता है तो टॉक्सिक (जहरीले तत्व) पूरे शरीर में फैलता है। इसके दुष्प्रभाव से सुस्ती और थकान आती है लेकिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने या वायरल लोड अधिक होने से बीमारी शरीर पर हावी नहीं हो पाती। रोगी को थकान भर आकर रह जाती है। इस बीच शरीर
में एंटी बॉडीज बन जाती हैं और संक्रमण ठीक हो जाता है। ऐसे लोगों को अक्सर बीमारी पता ही नहीं चल पाती।
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