कानपुर देहात। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार गंभीर है। लगातार बैठकें कर निर्देश दिए जाते हैं कि मरीजों को त्वरित इलाज मिले। किसी भी तरह की परेशानी न हो। मगर इसको लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं दिखते। मेडिकल कॉलेज में स्टॉफ की भरमार होने के बाद भी यहां आने वाले मरीजों को मदद नहीं मिल पा रही है। जांच कराने से लेकर छुट्टी होने या फिर रेफर होकर आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर से लाने, ले जाने में तीमारदार ही सहारा बनते हैं। ऐसे में मरीज व उनके घरवालों को परेशान होना पड़ता है। शुक्रवार को इमरजेंसी से लेकर एक्सरे कक्ष तक का यही हाल रहा। कई मरीज परेशान दिखे।
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सीन-1
हाजीपुर कैलई गांव की कल्लो देवी (42) का पैर टूट गया था। घर के सदस्य उन्हें लेकर अस्पताल आए। यहां पर आर्थो ओटी में दोपहर 12 बजे के करीब प्लास्टर कर छुट्टी की गई। काफी देर तक घर के लोग स्टेचर लिए खड़े रहे। कोई मदद को नहीं दिखा तो तीन सदस्य कल्लो को स्टेचर पर लेकर स्वयं इमरजेंसी से बाहर निकले और किसी तरह गाड़ी में बैठाकर घर चले गए।
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सीन-2
मुरलीपुर की रमा देवी (45) को पेट दर्द की समस्या थी। परेशानी बढ़ने पर परिवार के लोग उन्हें लेकर शुक्रवार को इमरजेंसी आए। यहां पर डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज किया। इसके बाद ड्रिप लगाकर भर्ती के लिए पर्चा बना दिया। रमा व उसके परिजन काफी देर तक वार्ड तक पहुंचने के लिए इंतजार करते रहे। उसे कोई मदद के लिए नहीं मिला। इस दौरान उनके साथ आई एक महिला हाथ में ड्रिप (ग्लूकोज की बोतल) लिए खड़ी दिखी।
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सीन-3
औरैया निवासी सुरेंद्र सिंह (60) का कुछ दिन पहले कूल्हे से ऊपर चोट आ गई थी। उन्हें चलने में परेशानी हो रही थी। शुक्रवार दोपहर 12 बजे के करीब उनके रिश्तेदार उन्हें लेकर अकबरपुर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचे। यहां पर आर्थो ओटी में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने उन्हें एक्सरे कराने की सलाह दी। काफी देर तक घर वाले स्टॉफ की मदद के लिए खड़े रहे। कोई नहीं दिखा तो स्वयं स्ट्रेचर लेकर एक्सरे कक्ष तक पहुंचे।
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वर्जन........
इमरजेंसी में पर्याप्त स्टाफ की ड्यूटी है। सभी को निर्देश हैं कि छुट्टी होने व रेफर होकर आने वाले मरीजों की मदद करें। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हो रही है तो कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी मरीज ने कोई शिकायत नहीं की है। - डॉ. खालिद रिजवान, सीएमएस