कानपुर। इलाज में लापरवाही से पूरे शरीर में कैंसर फैल जाने से महिला की मौत के मामले में उपभोक्ता आयोग ने हॉस्पिटल, डायग्नोस्टिक सेंटर व बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से इलाज में खर्च हुए 65 हजार रुपये मृतका के पति को देने का आदेश दिया है। साथ ही क्षतिपूर्ति के लिए सात लाख रुपये वाद दाखिल करने की तारीख से भुगतान की तारीख तक सात प्रतिशत ब्याज के साथ देने होंगे। 20 हजार रुपये वाद व्यय भी अदा करना होगा। कुल रकम करीब 14 लाख रुपये चुकाने होंगे।
महाराजपुर के डोमनपुर निवासी अशोक कुमार सविता ने पत्नी बबली को विनोबानगर स्थित जैन हॉस्पिटल में डॉ. रचना जैन को दिखाया। डॉ. रचना के कहने पर लालबंगला स्थित लालबंगला डायग्नोस्टिक सेंटर से बबली का अल्ट्रासाउंड करवाया। अल्ट्रासाउंड देखकर डॉ. रचना ने गर्भाशय के साथ ट्यूमर जुड़े होने की बात बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। ऑपरेशन के 15 हजार रुपये जमा करवाए और 2400 रुपये की अन्य जांचें करवाईं। नौ अगस्त 2014 को ऑपरेशन कर बबली का ट्यूमर और गर्भाशय दोनों निकाल दिया गया और डिस्चार्ज कर दिया गया। फिर भी बबली की परेशानी व पेट दर्द खत्म नहीं हुआ।
इस पर डॉ. रचना ने माधवी हॉस्पिटल की डॉ. माधवी को दिखाने की सलाह दी। डॉ. माधवी ने जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में दिखाने की सलाह दी। बबली कई दिनों तक हैलट में भर्ती रहीं। तीन जनवरी 2015 को डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि सही ढंग से ऑपरेशन न किए जाने के कारण कैंसर पूरे शरीर में फैल गया है। बबली की 10 फरवरी 2015 को मौत हो गई थी। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अशोक ने जैन हॉस्पिटल के संचालक, लालबंगला डायग्नोस्टिक सेंटर और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कं.लि. की लखनऊ स्थित गोल मार्केट शाखा प्रबंधक के खिलाफ 24 मार्च 2015 को परिवाद दर्ज कराया था।