कानपुर देहात। ठंड और शीतलहर से बचाव को लेकर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल में बुधवार को जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। चिकित्सा विशेषज्ञों ने कड़ाके की ठंड में स्वस्थ रहने के वैज्ञानिक तरीके बताए। प्राचार्य डॉ. एसएल वर्मा ने कहा कि गर्म कपड़ों के लेयरिंग और सही खानपान ही ठंड से सबसे बड़ा बचाव है। शीतल लहर में लापरवाही भारी पड़ सकती है।
प्राचार्य ने लोगों को जानकारी देते हुए कहा कि कड़ाके की ठंड को देखते हुए आम जनमानस को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर युवा वर्ग फैशन के चक्कर में या हेलमेट न पहनने की वजह से अपने सिर और कान खुले रखते हैं, जो स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है। बताया कि ठंडी हवा हमारे श्वसन और भोजन तंत्र के जरिये शरीर के अंदर पहुंच कर गंभीर बीमारियां पैदा करती हैं। केवल एक भारी जैकेट के बजाय शरीर के भीतर गर्म कपड़ों (इनर आदि) की कई परतें यानी लेयरिंग पहनना एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
वहीं, डॉ. नेहा अग्रवाल ने गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के प्रति विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया। बताया कि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए इन्हें ठंड में बाहर निकलने से बचना चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर को अंदरूनी मजबूती मिले। डॉ. आराधना यादव ने बताया कि ठंड में अक्सर हमें प्यास का अनुभव कम होता है, जिसके कारण हम पानी पीना भूल जाते हैं। शरीर में रक्त संचार को सुचारू बनाए रखने के लिए पानी की निरंतर आवश्यकता होती है। प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर गुनगुना पानी पीते रहना चाहिए। संचालन डॉ. स्मृति वर्मा, डॉ. आकांक्षा गुप्ता द्वारा किया गया। यहां यहां डॉ. प्रसून सचान, डॉ. दीपाली राज सिंह, डॉ. आराधना कुमारी आदि मौजूद रहीं।
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सर्दी से बचाव के लिए किए गए बेहतर इंतजाम
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. वंदना सिंह ने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए ठंड से बचाव को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। परिसर में अलाव की व्यवस्था कराई गई है। इसके साथ ही वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए प्रत्येक मरीज को तीन से चार कंबल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अस्पताल में विशेष वॉर्न रूम तैयार हैं जहां बिना किसी सफोकेशन (घुटन) के मरीजों को सुरक्षित गर्माहट दी जा रही है।