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Kanpur News: बाजार से एनसीईआरटी की किताबें गायब, निजी प्रकाशकों की चांदी

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फोटो 20::
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फोटो 21::रामबरन।
फोटो 22::प्रदीप कुमार।

अभिभावकों को तीन से चार गुना अधिक कीमतों में खरीदनी पड़ रहीं निजी प्रकाशन की पुस्तकें

संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पूरा पाठ्यक्रम बाजार में आसानी से मुहैया नहीं हो रहा है। जबकि नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया था।
एक जुलाई से विधिवत कक्षाएं चल रही हैं। इसके बावजूद कक्षा नौ से 12वीं की किताबों के पूरे पाठ्यक्रम का सेट बाजार में खोजे नहीं मिल रहा है। मजबूरी में छात्र-छात्राओं को निजी प्रकाशकों की एनसीईआरटी आधारित महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। वहीं कुछ छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से काम चला रहे हैं।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने को कहा है। परिषद ने इसके लिए प्रकाशक व रेट सूची भी जारी की है। इसका उद्देश्य अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने से बचाने के अलावा उच्च शिक्षण गुणवत्ता बनाए रखना है। प्रकाशकों की मनमानी से अभिभावकों को धरातल पर राहत नहीं मिल पा रही है।
प्रकाशकों की ओर से पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति नहीं होने से अभिभावकों को किताबें क्रय करने में 800 से एक हजार रुपये अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। अभिभावकों को कक्षा नौ के लिए एनसीईआरटी की तरफ से मात्र 363 रुपये में मिलने वाला किताबों का सेट 1395 रुपये में, वहीं दसवीं कक्षा की किताबों का सेट 452 रुपये की जगह 1580 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
यही हाल कक्षा व 11 व 12 का भी है। नए शैक्षिक सत्र को चार माह बीत जाने के बावजूद बाजार में एनसीईआरटी की किताबें ढूंढे नहीं मिल रही हैं। वहीं निजी कॉलेज समेत सरकारी कॉलेजों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों से पढ़ाई करवाई जा रही है।

कीमतों में तीन से चार गुना तक है अंतर

कक्षा एनसीईआरटी निजी प्रकाशक
नौ 363 1395
10 452 1580
11 (विज्ञान वर्ग) 580 2050
11 (कला वर्ग) 485 1850
12 (विज्ञान वर्ग) 620 2230
12 (कला वर्ग) 510 2080

नोट- सभी कीमतें रुपये में है, जो एक पुस्तक विक्रेता की ओर से उपलब्ध करवाई गई है।


कॉलेजों की स्थिति
जीआईसी - 21
वित्तपोषित- 54
वित्तविहीन- 215


बोले अभिभावक

फोटो 21::रामबरन।
1- निवाड़ीकला निवासी अभिभावक रामवरन ने बताया कि वह बीते कई दिनों से सरकारी किताबों के लिए परेशान रहे। जब किताबें नहीं मिली तो बाजार में उपलब्ध पुस्तकें खरीदनी पड़ी। अगर शिकायत भी करते है तो बच्चे की पढ़ाई प्रभावित होगी।

फोटो 22::प्रदीप कुमार।
2- नगला तुला निवासी अभिभावक प्रदीप कुमार का कहना है कि शहर के अधिकतर कॉलेजों में अलग-अलग प्रकाशन की पुस्तकें चल रहीं है। विज्ञान से लेकर हिंदी व अंग्रेजी के कई प्रकाशन बाजार में है। जो एनसीईआरटी की पुस्तक है वह मिलती ही नहीं है।
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वर्जन
सभी कॉलेज संचालकों को एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाने के निर्देश दिए गए है। वहीं, विद्यार्थियों को भी इसके लिए लगातार जागरूक किया जाता है। इसके साथ ही बोर्ड की बेवसाइट पर एनसीईआरटी की पुस्तकों की पीडीएफ अपलोड है, जिसे छात्र आसानी से डाउनलोड करके उसकी कॉपी निकाल सकते है। जिन कॉलेज संचालकों की ओर से शासन की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है,उनकी जांच करवाई जाएगी।
मनोज कुमार, डीआईओएस
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