सिर्फ कॉल डिटेल को लेकर अवनीश से तीन घंटे तक पूछताछ की गई। पुलिस को अवनीश से कई अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस का मानना है कि इस घटना में अवनीश महज मुखौटा है। पर्दे के पीछे से पूंजीपतियों, वकीलों और सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों का सिंडीकेट काम कर रहा था। अवनीश के मोबाइल से इन सभी लोगों से हुई बातचीत की वाइस रिकॉर्डिंग साक्ष्य के रूप में तैयार कर इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है।
विवाद को मैनेज करने का मिला था भरोसा
जांच में पता चला है कि अवनीश को शहर के पूंजीपतियों, अधिवक्ताओं और सत्ताधारी नेताओं के सिंडीकेट से जमीन कब्जाने के लिए संरक्षण और हर स्थिति को मैनेज करने का भरोसा मिला था। इस जमीन के अलावा अन्य मामलों में भी अवनीश की इसी सिंडीकेट ने मदद की थी। जमीन में पूंजीपतियों का पैसा लगता था। कुछ वकीलों ने शहर से लेकर हाईकोर्ट तक अन्य जमीनों समेत नजूल की संपत्तियों को क्लीयर कराने का ठेका लिया और सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों ने मामले को मैनेज कराने का भरोसा दिलाया। अब जिन बड़े लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, पुलिस उन सभी की मामले में भूमिका, कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजेक्शन समेत अन्य साक्ष्य जुटा रही है।
यह था मामला
सिविल लाइंस स्थित करोड़ों की नजूल की जमीन कब्जाने के प्रयास में कोतवाली पुलिस ने अवनीश दीक्षित व उसके साथियों के खिलाफ दो रिपोर्ट दर्ज की थी। अवनीश और राहुल वर्मा को जेल भेजा जा चुका है। इसके बाद फरार नौ आरोपियों पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया था। शुक्रवार को मनोज यादव उर्फ बंदर को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वर्तमान में अवनीश दीक्षित को कोर्ट ने 14 अगस्त को 10 दिन की रिमांड पर पुलिस कस्टडी में भेजा है, जहां पुलिस उससे करीब 250 सवालों के सिलसिलेवार तरीके से जवाब हासिल करने की कोशिश में जुटी है।