आईआईटी कानपुर में जल्द ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ कैंसर के इलाज पर भी शोध होगा। आईआईटी कानपुर प्रशासन ने इस ओर बड़ा कदम बढ़ाते हुए कैंपस में टाटा ट्रस्ट के सहयोग से नेशनल कैंसर ग्रिड स्थापित करने का फैसला लिया है।
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इसका खाका तैयार करने के लिए निदेशक प्रो. अभय करिंदकर ने डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. एस गणेश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। दरअसल, ट्रस्ट की ओर से देश के कई शहरों में कैंसर के इलाज की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए नेशनल कैंसर ग्रिड की स्थापना की जा रही है। ट्रस्ट ने आईआईटी कानपुर में मेडिकल क्षेत्र में हो रहे कार्यों को देखते हुए यहां भी ग्रिड स्थापित करने का फैसला लिया है। ग्रिड में आईआईटी के विशेषज्ञ दुनिया भर के बड़े चिकित्सकों के साथ शोध करेंगे। इसके अलावा इलाज में प्रयोग में लाई जाने वाली सस्ती मशीनों पर भी आईआईटीयंस काम करेंगे। निदेशक प्रो. करिंदकर ने बताया कि टाटा ट्रस्ट से बातचीत हो गई है। ग्रिड का क्या प्रारूप होगा, इसकी प्लानिंग के लिए डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. एस गणेश की अध्यक्षता में कमेटी काम करेगी। इसमें प्रो. प्रदीप सिन्हा, प्रो. ओमकार, प्रो. संदीप वर्मा और प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय शामिल हैं।
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जुड़ेंगे शहर के सभी सरकारी अस्पताल
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ग्रिड बनने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यहां यदि कभी किसी क्षेत्र का एक्सपर्ट मौजूद नहीं है, तो टाटा समूह के दूसरे कैंसर अस्पतालों के विशेषज्ञ भी उपलब्ध हो सकेंगे। इस सुविधा का लाभ यहां के सरकारी अस्पताल भी उठा सकेंगे। इसके लिए सरकारी अस्पतालों को भी इस ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
निशुल्क सेवाएं मुहैया कराएगा ट्रस्ट
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टाटा ट्रस्ट कैंसर के इलाज में कई सुविधाएं मुहैया कराएगा। यह सहायता ट्रस्ट बगैर किसी लाभ के देगा। इसके लिए इंस्टीट्यूट या सरकार की ओर से टाटा ट्रस्ट या समूह को कोई भुगतान नहीं करना होगा। यहां तक कि टाटा की ओर से उपलब्ध कराए गए विशेषज्ञों को भी सरकार कोई धनराशि नहीं देनी होगी।
आईआईटी कानपुर देश का पहला संस्थान बनने जा रहा है, जहां इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल पर काफी फोकस किया जा रहा है। हाल के दिनों में नवजात शिशुओं में पीलिया के इलाज के लिए फोटोथेरेपी मशीन विकसित की गई। इसके अलावा डेंगू किट, न्यूरो से जुड़ी बीमारियों को दूर करने सहित कई बड़े रिसर्च हुए हैं।