लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रमुख प्रत्याशी बड़े पैमाने पर धन खर्च करते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अलग- अलग चुनावों के लिए खर्च की सीमा भी तय कर रखी है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब प्रत्याशी चुनाव में लाखों करोड़ों रुपये खर्च नहीं करते थे। दिग्गज नेता नरेश अग्रवाल की किताब नरेश अग्रवाल के राजनीतिक 50 वर्ष में उल्लेख है कि 1980 में उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव पार्टी से मिले 20 हजार रुपये से लड़ा था।
इतने में ही चुनाव लड़कर विधायक भी बन गए थे। सात बार विधायक, तीन बार मंत्री और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे नेता नरेश अग्रवाल की एक पुस्तक बीते वर्ष नवंबर में प्रकाशित हुई थी। देवकी नंदन मिश्र से संवाद के आधार पर प्रकाशित पुस्तक में 50 साल में कितनी बदल गई राजनीति विषय से भी एक आलेख है। इसमें नरेश अग्रवाल के हवाले से उल्लेख है कि 1980 में उन्होंने विधानसभा का पहला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर हरदोई विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था। इस चुनाव में पार्टी की ओर से 20 हजार रुपये दिए गए थे। नरेश अग्रवाल ने इसी आलेख में यह भी लिखा है कि लोग राजनीति में पैसे को महत्व न दें, बल्कि देश की चिंता करें।
निधि के कारण लगते हैं करप्शन के आरोप
पुस्तक में नरेश अग्रवाल के हवाले से उल्लेख है कि नेताओं पर विकास निधि के कारण करप्शन के आरोप लगते हैं। किताब में लिखा है कि 1980 के दौर में नेता सेवा के लिए आता था और पैसा पैदा करना उद्देश्य नहीं होता था। नरेश अग्रवाल लिखते हैं कि तब राजनीति में विश्वास की भावना थी और अब अविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।