यूपी के बांदा जिले में थाने के अंदर 19 वर्षीय शिवानी की हत्या में नया खुलासा हुआ है। पुलिस की लापरवाही भारी पड़ गई। महकमे की किरकिरी हुई है। शिवानी हत्याकांड ने पुलिस की कार्यशैली के साथ व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
यूपी के बांदा जिले में थाने के अंदर 19 वर्षीय शिवानी की हत्या का मामला अब केवल हत्या या प्रेम प्रसंग तक सीमित नहीं रह गया है। प्रकरण को लेकर पुलिस महकमे की किरकिरी तो हुई ही साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। दो वर्षों तक चले प्रेम संबंध, परिवारों के विरोध, घर छोड़कर की गई शादी और आखिरकार थाने के भीतर हुई हत्या ने पूरे घटनाक्रम को कई गंभीर सवालों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस युवती को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए थाने लाया गया था, उसकी जान पुलिस की मौजूदगी में कैसे चली गई। पुलिस को देखकर पीड़ित की हिम्मत बंधनी तो दूर की बात यहां जान ही चली गई। घटना के वक्त ऐसा नहीं था कि सूनसान स्थान पर घटनाक्रम को अंजाम दिया गया हो बल्कि खाकी की मौजूदगी में यह दुस्साहस किया गया।
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बरछा-बा गांव निवासी शिवानी और पड़ोस में रहने वाले ललित वर्मा का प्रेम संबंध करीब दो वर्ष पुराना बताया जा रहा है। दोनों परिवारों को जानने वालों का कहना है कि प्रेम प्रसंग को लेकर कई बार विवाद भी हुआ लेकिन पक्षों को समझा-बुझाकर शांत करा दिया गया। दोनों के परिवारों को इसकी जानकारी थी और कई बार समझौते के प्रयास भी हुए, लेकिन बात नहीं बनी।
घर छोड़कर चली गई थी शिवानी
18 मई को शिवानी घर छोड़कर ललित के साथ चली गई और दोनों ने विवाह कर लिया। बेटी के इस फैसले से नाराज पिता सत्यकुमार सिंह लगातार उसे वापस लाने की कोशिश कर रहा था। सूचना पर कई बार वह बेटी को तलाशने भी निकला था।
मध्यप्रदेश से पति के साथ लाई थी पुलिस
इस दौरान शुक्रवार को मध्य प्रदेश से शिवानी और उसके पति को पकड़कर बदौसा थाने लाया गया। यहां युवती के बयान और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। किसी को जरा सा अंदेशा भी नहीं था कि अगले कुछ ही पलों में किसी की जान जाने वाली है।
इसी दौरान मौका मिलते ही पिता ने जेब से रामपुरी चाकू निकालकर बेटी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल शिवानी को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
घटना के बाद सामने आए तथ्यों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थाने में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और न ही आरोपी की प्रभावी तलाशी ली गई। अगर समय रहते पुलिस मामले की संवेदनशीलता को भांप जाती तो शायद आज शिवानी जिंदा होती। पुलिस की यही लापरवाही युवती की हत्या की वजह तो बनी ही साथ ही महकमे की जमकर चौतरफा किरकिरी भी हो रही है। पुलिस के लिए भी चुनौती है।
संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ क्या होगी कार्रवाई
पुलिस विभाग में लाइन हाजिर किया जाना प्रारंभिक अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता है। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा सकती है। जांच अधिकारी आरोपों की समीक्षा कर सभी पक्षों के बयान दर्ज करेंगे।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर चेतावनी, वेतनवृद्धि रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि, निलंबन अथवा सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई के अगले चरण में यह तय होगा कि थाने के भीतर हुई इस सनसनीखेज हत्या के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।
कई थाना प्रभारी इधर से उधर
एसपी पलाश बंसल ने कोतवाली देहात में तैनात सीपी तिवारी को थाना बिसंडा, अतर्रा प्रभारी संजीव चौबे को देहात कोतवाली, बबेरू थाना में तैनात उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी बदौसा की कमान सौंपी है। इसके साथ ही 10 उपनिरीक्षकों का भी कार्यक्षेत्र परिवर्तित किया गया है।