‘मोदी सरकार पिछले छह महीने से देश की जनता को सिर्फ भाषणों की घुट्टी ही पिला रही है। गरीबों का पेट भरने वाली योजनाएं बंद कर उद्योगपतियों का बैंक बैलेंस बढ़ा रही है।
इससे ज्यादा अभी तक इस सरकार ने कुछ नहीं किया है।’ ये बातें राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शनिवार को मनरेगा सम्मेलन में कही।
उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना को बंद करने की केंद्र सरकार की साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। इसके खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि मनरेगा के तहत काम करने वाले प्रदेश भर के मजदूरों की मजदूरी लंबे समय से नहीं दी जा रही है। मजदूरी का कुल बकाया सात करोड़ है।
अकेले कानपुर में 70 लाख और सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पौने पांच करोड़ की मजदूरी रोक दी गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि मनरेगा को बंद करने के पीछे मोदी सरकार की बड़ी साजिश है।
वह इन मजदूरों को मनरेगा से हटाकर उद्योगपतियों के उद्योगों के लिए सस्ते में मजदूर उपलब्ध कराना चाहती है। यह सब लोकसभा चुनाव के दौरान उद्योगपतियों से चंदा लेते समय ही मोदी ने वादा किया था।
अब उसी का कर्ज उतार रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण को अध्यादेश के जरिए लागू करने के पीछे भी यही कारण है।
कार्यक्रम संयोजक संजय दीक्षित ने कहा कि मनरेगा सम्मेलन का उद्देश्य मजदूरों की बकाया मजदूरी सरकार से दिलाने के लिए संघर्ष करना और इस योजना को जिंदा रखना है।