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आतंकी सैफुल्ला और सरताज के इर्द-गिर्द ऋषि कपूर की फिल्म ‘मुल्क’ की कहानी

Fri, 03 Aug 2018 05:11 PM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर

सार

- 08 मार्च 2018 को लखनऊ एनकाउंटर में मारा गया था कानपुर का सैफुल्ला
- ‘तुम बिन’, ‘दस’, ‘गुलाब गैंग’, ‘रा-वन’ फिल्मों का निर्देशन कर चुके अनुभव सिन्हा हैं ‘मुल्क’ के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर 
 
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सरताज खान की जिंदगी से प्रेरित
सुर्खियां में छाई डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘मुल्क’ की कहानी कानपुर के सरताज खान की जिंदगी से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म के मुख्य कलाकार ऋषि कपूर हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त लड़के के पिता का रोल कर रहे हैं। आशुतोष राणा और तापसी पन्नू वकील के रोल में हैं। 3 अगस्त को फिल्म को रिलीज करने की तैयारी है। 

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‘तुम बिन’, ‘दस’, ‘गुलाब गैंग’, ‘रा-वन’ फिल्मों का निर्देशन कर चुके अनुभव सिन्हा हैं ‘मुल्क’ के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर
हालांकि डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने फिल्म को सच्ची घटना से प्रेरित बताया है और ट्रेलर में इसका जिक्र भी किया है लेकिन फिल्म निर्माण कंपनी ने कानपुर (जाजमऊ) के सैफुल्ला या उसके पिता सरताज के जीवन पर कहानी पर आधारित होने की पुष्टि नहीं की है। पहले कुछ लोग मान रहे थे कि फिल्म की पृष्ठभूमि में 26/11 के मुंबई आतंकी हमले को लिया गया है। लेकिन ट्रेलर के बाद जानकार कह रहे हैं कि फिल्म लखनऊ के एक रिहायशी इलाके में हुए सैफुल्ला एनकाउंटर की कहानी के तार लेकर रची गई है। फिल्म की शूटिंग पिछले साल लखनऊ और वाराणसी में हुई थी। फिल्म में मुराद अली मोहम्मद के रोल में अभिनेता ऋषि कपूर, शाहिद मोहम्मद के रोल में प्रतीक बब्बर, दानिश जावेद के रोल में रजत कपूर, आरती मल्होत्रा के रोल में तापसी पन्नू, संतोष आनंद के रोल में आशुतोष राणा दिखाई देंगे।  

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- सैफुल्ला और सरताज की रियल कहानी...
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डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘मुल्क’ की कहानी कानपुर के सरताज खान की जिंदगी से प्रेरित
08 मार्च 2017 को लखनऊ एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्ला के पिता सरताज ने बेटे का शव लेने से मना कर दिया था और ये बात कहकर सबको चौंका दिया कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। देशद्रोही के साथ ऐसा ही होना चाहिए। कानपुर के जाजमऊ इलाके का रहने वाला सैफुल्ला धर्मस्थलों पर धमाका करने की साजिश रच रहा था। कानपुर के मनोहर नगर, जाजमऊ इलाके में 1995 में सैफुल्ला का जन्म हुआ था। सैफुल्ला बचपन से ही पढ़ने में तेज था। उसके पिता सरताज चमड़े का छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं। सैफुल्ला के दो भाई खालिद और मुजाहिद हैं एक बहन बहन भी है। चार भाई बहनों में सैफुल्ला तीसरे नंबर का था।

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सैफुल्ला के पिता सरताज ने बेटे का शव लेने से मना कर दिया था
सैफुल्ला के पिता सरताज के छह भाई हैं। जिनमें नूर अहमद, ममनून, सरताज, और मंसूर मनोहर नगर वाले घर में रहते हैं और दो बाकी दो भाई नसीम और इकबाल तिवारीपुर वाले मकान में रहते हैं। सैफुल्ला बीकॉम सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के संपर्क में आने के बाद उसने अपने घर में बम बनाने के तरीके सीखे थे। आमतौर पर शांत रहने वाला सैफुल्ला कभी-कभी ऐसा बन जाता था कि जैसे वह शैतान हो। उसके मोहल्ले के दोस्तों ने बताया कि पांच साल पहले सैफुल्ला का एक लड़की को लेकर इलाके में ही विवाद हो गया था जिसके बाद उसने असलहों से हवाई फायरिंग भी की थी।
किरदार
'मुल्क' फिल्म की खास बात यह है कि इसके हर किरदार को बहुत ही खूबसूरती के गढ़ा गया है। वहीं इन किरदारों ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया भी है। मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू (तापसी पन्नू) से लेकर मुस्लिम आतंकवादी की जांच करने वाले ऑफिसर दानिश जावेद (रजत कपूर) तक के हर एक किरदार को परदे पर बड़े ही शानदार तरीके के पेश किया गया है।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- घर से मिला था आईएसआईएस का झंडा...
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सरताज ने बेटे की लाश भी नहीं देखी न ही उसका अंतिम संस्कार किया था
सैफुल्ला के घर से पुलिस को आईएसआईएस का झंडा और बम बनाने के आइटम के साथ हिन्दुस्तान का नक्शा भी मिला है। एनकाउंटर में सैफुल्ला की मौत के बाद उसके पिता सरताज ने घटना पर अफसोस जताते हुए कहा था कि जो देश के खिलाफ हम उसके खिलाफ हैं। सरताज ने बेटे की लाश भी नहीं देखी न ही उसका अंतिम संस्कार किया था। सरताज के इस फैसले की पूरे देश और संसद तक  में तारीफ हुई थी।  

फिल्म की कहानी
चूंकी बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्में भारत-पाकिस्तान विवाद या किसी दंगे पर आधारित होती हैं। लेकिन फिल्म 'मुल्क' के साथ ऐसा नहीं है। इसकी कहानी असल में एक मुस्लिम परिवार के खोये सम्मान पर आधारित है, जिसे घर के आतंकवादी बेटे (प्रतीक बब्बर) की वजह से अपने मोहल्ले और समाज में बदनाम होना पड़ता है।

 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- शाहिद (प्रतीक बब्बर) और मुराद अली (ऋषि कपूर) की फिल्मी कहानी...
 
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अगले महीने हो सकता है फिल्म का प्रदर्शन
‘मुल्क’ फिल्म में ऋषि कपूर (मुराद अली) पेशे से वकील बने हैं। प्रतीक बब्बर उनके बेटे शाहिद की भूमिका निभा रहे हैं। कहा जा रहा है कि प्रतीक बब्बर का रोल सैफुल्ला की जिंदगी से प्रेरित है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है। फिल्म में ऋषि कपूर एक ऐसे बाप का रोल निभा रहे हैं जिसका बेटा आतंकी गतिविधियों में शामिल था। मुराद अली मोहम्मद अपने बेटे की डेड बॉडी लेने से इंकार कर देता है।
फिल्म के डायलॉग्स
'मेरे मुल्क के लिए मेरा प्यार साबित करो' और 'मेरे घर में मेरा स्वागत करने का हक उन्हें किसने दिया', मुल्क की कहानी के अलावा फिल्म के ऐसे जबरदस्त डायलग्स भी दर्शकों के दिलों को जीतने में कामयाब होंगे। फिल्म में आशुतोष राणा के डायलॉग भी काफी दमदार हैं। 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- फिल्म के मशहूर डायलॉग...
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सरताज के इर्द-गिर्द ऋषि कपूर की फिल्म ‘मुल्क’ की कहानी
अपने धर्म के चलते उसे कई ट्रायल से गुजरना पड़ता है। ट्रेलर का डॉयलॉग- ‘हम भारतीय हैं, हमारा जन्म भारत में हुआ है, हमारे पूर्वजों का भी जन्म भारत में ही हुआ था।’ काफी मशहूर हुआ है। फिल्म में भावुक उतार-चढ़ाव वाले दृश्य भी हैं जिसमें सरताज को उनके पड़ोसी पाकिस्तान और आतंकी ओसामा बिन लादेन का समर्थक बताने लगते हैं। उनके घर पर पत्थर फेंके जाते हैं। तब तापसी पन्नू के जरिए से ऋषि कपूर अदालत में इस समाज के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं।

तापसी पन्नू
अब तक तापसी को हम सभी ने किसी ग्लैमरस (जुड़वा 2), रॉव एजेंट (नाम शबना) या फिर घर में रहने वाली एक इंडिपेंडेंट लड़की (पिंक) के किरदार में देखा है। इस फिल्म में वह घर की बहू के साथ वकील की भूमिका में भी नजर आईं। वकील के तौर पर तापसी को देखने दिलचस्प है। तापसी ने अपने वकील वाले किरदार को काफी खूबसूरती से निभाया है। 
असली आतंकवाद की परिभाषा
फिल्म 'मुल्क' देखने के दौरान हिंदू-मुस्लिम,देशद्रोह और जिहाद जैसी भारी शब्द भी सुनने को मिलते हैं। चूंकि फिल्म हिंदू-मुस्लिम जैसे गंभीर विषय पर आधारित है तो इसलिए फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक आपको सेक्युलरिजम का पाठ भी पढ़ाती है। फिल्म के आखिरी में जज के तौर पर नजर आते एक्टर कुमुद मिश्रा भी जिहाद और आतंकवाद के परिभाषा को बताने में कामयाब रहते हैं।   
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