कसबा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पैसे न देने पर प्रसव के बाद सात जच्चा-बच्चा को कड़ाके की ठंड में बर्फ जैसे ठंडे फर्श पर लिटाया गया। बिना गद्दे और कंबल के पूरी रात जच्चा-बच्चा ने कांपते-कांपते बिताई। सुबह उनमें से कुछ की हालत बिगड़ी तो परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। मामला बिगड़ते देख प्रसूताओं को बेड पर लिटाया गया। शाम को अधिकतर की छुट्टी कर उनके घर भेज दिया गया।
सीएचसी में शनिवार की दोपहर से देर रात तक 11 महिलाओं की डिलीवरी कराई गई। शनिवार की रात सोमवती पत्नी विजय सिंह, मीनू पत्नी शिवेंद्र (तिवारीपुर), गीता पत्नी नरेश (गुगुरा), गुड़िया पत्नी सरोजकुमार (बारीगांव मजरा), छोटी पत्नी रामबाबू (बंगला-कुड़नी), सुमन पत्नी सरवन (पासीखेड़ा) और अंजू पत्नी रामप्रसाद (चिरली) का प्रसव हुआ। प्रसूताओं के परिजनों ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात नर्स नेहा जादौन ने उनसे प्रत्येक डिलीवरी के नाम पर 6-6 सौ रुपये की मांग की। जिन महिलाओं ने रुपये दे दिए उन्हें बेड पर लिटाया गया जबकि जिन सात महिलाओं ने रुपये जमा नहीं किए उनको फर्श पर लिटा दिया गया। इतना ही नहीं प्रसूताओं को अस्पताल की ओर से गद्दे और कंबल भी नहीं दिए गए। परिजनों ने बताया कि साथ ले जाए गए बिस्तरों के सहारे कांपते कांपते रात काटी। सुबह कुछ प्रसूताओं की हालत बिगड़ने लगी। उनको सर्दी लगने के साथ ही उल्टी होने लगीं। यह देख परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पाकर चौकी से पुलिस भी अस्पताल पहुंची और हंगामा कर रहे परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया। फोन पर मामले की जानकारी सीएचसी के अधीक्षक डा. अनुज कुमार को दी गई। उन्होंने सभी महिलाओं को बेड पर लिटाने के निर्देश दिए एवं देखभाल के लिए प्रशिक्षित दाइयों की ड्यूटी लगवाई। दोपहर बाद हालात सामान्य होने पर तीन प्रसूताओं की अस्पताल से छुट्टी कर दी गई।
नर्स को कई बार दी गई है चेतावनी
सीएचसी के अधीक्षक डा. अनुज कुमार दीक्षित ने बताया कि अस्पताल में महिला डॉक्टर न होने से प्रसव संबंधी कार्य संविदा पर तैनात स्टाफ नर्स नेहा जादौन ही देखती है। उसके खिलाफ पहले भी तमाम शिकायतें मिली हैं। कड़ाके की ठंड में प्रसूताओं को फर्श पर लिटाया जाना बड़ी लापरवाही है। इसकी रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई के लिए सीएमओ के पास भेजेंगे। इधर, स्टाफ नर्स नेहा जादौन ने बताया कि सीएचसी के जच्चा-बच्चा वार्ड में मात्र तीन बेड हैं, जिससे समस्या होती है। नर्स ने रुपये मांगने की बात से इंकार किया। दूसरी ओर इस संबंध में बात करके के लिए सीएमओ डॉ. आरपी तिवारी को दो बार फोन मिलाया गया पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। मैसेज भी किया गया पर जवाब नहीं दिया।
नर्सों की मनमानी पर जननी सुरक्षा योजना
भीतरगांव। सीएचसी में जननी सुरक्षा योजना के नाम पर नर्सों का खेल चल रहा है। प्रसूताओं को अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का लाभ भी नहीं मिलता है। महिला डॉक्टर के रूप में डा. अलका शुक्ला सप्ताह में सिर्फ एक दिन गुरुवार को अस्पताल आती हैं। इस दिन अस्पताल में महिला नसबंदी शिविर का आयोजन होता है। अन्य दिनों उनकी तैनाती सीएचसी सरसौल में रहती है। अस्पताल में पांच नर्सों की तैनाती है जो क्रम से 12-12 घंटे की ड्यूटी करती हैं। महिला डॉक्टर की तैनाती न होने का पूरा फायदा नर्सें उठाती हैं। प्रसूताओं एवं उनके परिजनों ने बताया कि किसी महिला को प्रसव के लिए भर्ती कराए जाने पर नर्सें पहले पेट में बच्चा उल्टा है, सामान्य प्रसव हो पाना संभव नहीं है, बच्चा ऑपरेशन के बिना नहीं हो सकता है जैसे भय दिखाती हैं। इसके बाद परिजनों से धन उगाही करती हैं। सीएचसी में तीस बेड की सुिवधा उपलब्ध है, जिसमें महिलाओं के लिए 15 बेड आरक्षित हैं। इसके बावजूद लेबर रूम में सिर्फ तीन बेड ही डाल रखे गए हैं। शेष 12 बेड अस्पताल की दूसरी मंजिल पर हैं। लोगों का आरोप है कि ऊपरी मंजिल में पड़े बेडों पर सुविधा शुल्क मिलने के बाद प्रसूता को लेटने की अनुमति दी जाती है।