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Kanpur News: सीएसए में कल और परसों प्रस्तुत होंगे 150 से अधिक शोध पत्र

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कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 29 और 30 अगस्त को देश भर के 115 से अधिक कृषि वैज्ञानिक जुटेंगे। यहां भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) के सहयोग से रबी दलहनी फसलों पर राष्ट्रीय वैज्ञानिक मंथन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें चना, मटर, मसूर आदि की नई प्रजातियों, रोग, उन्नत तकनीक और 150 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। रबी दलहनी फसलों के संबंध में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे कृषि मंत्रालय को भेजा जाएगा।
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दो दिवसीय बैठक के दौरान फसल सुधार, फसल सुरक्षा, फसल उत्पादन से संबंधित विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। चना, मसूर, मटर एवं अन्य रबी दलहनी फसलों से संबंधित अनुसंधान, रोग, कीट प्रबंधन, कृषि उत्पादन तकनीक, सूक्ष्मजीव विज्ञान और उन्नत उत्पादन तकनीकों पर वैज्ञानिक चर्चा की जाएगी। सीएसए के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि यह राष्ट्रीय स्तर का वैज्ञानिक आयोजन रबी दलहनी फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं टिकाऊ उत्पादन बढ़ाने के लिए नवीन अनुसंधान रणनीतियों के निर्धारण तथा देश की दलहन आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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डॉ. एमएल जाट करेंगे अध्यक्षता


सीएसए के मीडिया प्रभारी विज्ञानी डॉ. खलील खान ने बताया कि उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट करेंगे। डॉ. डीके यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), डॉ. एसके झा, सहायक महानिदेशक डॉ. जीपी दीक्षित, निदेशक दलहन अनुसंधान संस्थान मौजूद रहेंगे।
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स्वदेशी और सस्ती तकनीक पर जोर
डॉ. खलील खान ने बताया कि कृषि विशेषज्ञ देश के अलग अलग विश्वविद्यालयों, कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों से आएंगे। करीब 150 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें स्वदेशी, सस्ती तकनीक, रोग निवारण, उत्पादन बढ़ाना शामिल है। कई छात्र-छात्राएं भी अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत करेंगे।

कृषि यंत्रों की लगाई जाएगी प्रदर्शनी
दो दिनों में कई कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यह मेक इन इंडिया तकनीक से बने हुए रहेंगे। इनका उपयोग करने से किसानों का खर्च कम होगा, जबकि फसलों का उत्पादन बढ़ जाएगा। दो दिवसीय कार्यक्रम का मकसद किसानों की आय बढ़ाना है।
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