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भक्ति और मस्ती को समर्पित सावन का महीना शुरू, 5 सोमवार का जानें क्या है महत्व  

Tue, 11 Jul 2017 09:35 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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शिव पूजा
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भक्ति और मस्ती को समर्पित सावन का महीना आज से शुरू हो रहा है। 1992 के बाद इस बार सावन सोमवार से ही शुरू हो रहा है और सात अगस्त को रक्षाबंधन के दिन सोमवार को ही समाप्त हो रहा है। यह खास संयोग है। इस दौरान कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक, जप-तप अनादि-अनंत भगवान शिव को रिझाने के सारे विकल्प रहेंगे भक्तों के पास। शिव के साथ ही भगवान कृष्ण की भक्ति में भी सावन का विशेष महत्व है। इस दौरान बांके बिहारी के हिंडोले भी सजेंगे, फूल-बंगले भी। यही नहीं, बारिश के बीच झूमती प्रकृति, नाचते मोर, झूले की पींगें लेतीं और सोलह श्रृंगार करतीं युवतियों के लिए यह महीना मुंह मांगी मुराद से कम नहीं है।
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मंगला गौरी के साथ शिव की पूजा देगी लाभ

शिव पूजा
पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि जिनका दांपत्य जीवन खराब है, जिन लड़कियों का विवाह नहीं हो रहा है उन्हें इस सावन में मंगला गौरी के साथ पूजन करना चाहिए। सोमवार को रुद्राभिषेक करें और मंगलवार के दिन मंगला गौरी का पूजन करें। 16-16 वस्तुएं भगवती को अर्पण करें। ऐसा करने से गलतफहमियां दूर होंगी, रिश्तों में सुधार होगा। लड़कियों को मनवांछित फल प्राप्त होगा।
पंडित ओंकरनाथ ने बताया कि जिस सावन में 5 सोमवार पड़ते हैं। वह सर्वश्रेष्ठ सावन होता है।

इसका कारण है कि भोले शिव के पांच मुख है। पश्चिम का मुख सद्योेजात, उत्तर का मुख बामदेव, पूर्व का मुख ततपुरुष, दक्षिण का मुख अघोर तथा ऊपर का मुख ईशान। इस प्रकार पांच सोमवार को इन पांच मुखों की पूजा अर्चना करें। इससे शिवजी की संपूर्ण पूजा करने का भक्तों को अवसर मिलेगा।

आचार्य सत्यप्रकाश मिश्रा ने बताया कि जो मनुष्य साल भर प्रदोष व्रत नहीं कर पाते हैं, वे सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत कर सकते हैं। उन्हें उतना ही लाभ मिलेगा जितना साल भर के प्रदोष व्रत करने से मिलता है। हां, एक बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रदोष काल में ही भगवान शिव की आराधना करें। उन्होंने बताया कि मानव मात्र के कल्याण के लिए ऊं नम: शिवाय: का जप करें।
 

ये हैं 5 सोमवार की तारीखें...

शिव पूजा
पहला सोमवार व्रत- 10 जुलाई को
दूसरा सोमवार व्रत- 17  जुलाई को
तीसरा सोमवार व्रत- 24 जुलाई को
चौथा सोमवार व्रत- 31 जुलाई को
पांचवां सोमवार व्रत-7 अगस्त को
 

सावन में पड़ने वाले पर्व

शिव पूजा
​18 जुलाई को-मंगला गौरी व्रत
19 जुलाई को-कामदा एकादश्ी व्रत
21 जुलाई को-प्रदोष व्रत
23 जुलाई को- हरियाली अमावस्या
26 जुलाई को-हरियाली तीज
27 जुलाई को-नाग पंचमी
3 अगस्त को-पुत्रदा एकादशी
5 अगस्त को-शनि प्रदोष व्रत
7 अगस्त को-रक्षा बंधन, सावन मास का समापन
 

आनंदेश्वर मंदिर परमट में

शिव पूजा
सावन में इस बार सोमवार के दिन रविवार की रात 2:30 बजे पट खुलेंगे। अन्य दिन भोर में 4.30 बजे खुलेंगे। 11.30 बजे बंद होकर एक बजे खुलेंगे। इसके बाद शाम को 7.30 बजे बंद होंगे और 9 बजे खुलेंगे। सोमवार को रात को 8.30 बजे बंद होंगे और 9 बजे खुलेंगे। मंदिर के महंत रमेशपुरी ने बताया कि पूरे श्रावण मास में भक्तों की ओर से शयन शृंगार होगा। उन्होंने बताया कि सोमवार के लिए परमट मंदिर प्रांगण में रहने वालों को जिला प्रशासन की ओर से पास आवंटित किया जाएगा, ताकि उन्हें आने जाने में कोई परेशानी न हो। पार्किंग निशुल्क होगी। परमट तिराहे की ओर पेट्रोल पंप तक चार पहिया वाहन आएंगे। जबकि दो पहिया वाहन बक्कल मैदान तक आएंगे। ग्रीनपार्क की ओर सेंट्रल बैंक तिराहे तक वाहन आएंगे।
 

जागेश्वर मंदिर नवाबगंज में

शिव पूजा
मंदिर के पट प्रतिदिन भोर में 3.45 बजे खुलेंगे। 11.45 बजे बंद होंगे और 12.05 बजे खुलेंगे। इसके बाद रात को शयन आरती 9.45 बजे होकर पट बंद होंगे। सोमवार के दिन रात में शयन आरती 10.30 बजे होगी। मंदिर के सर्वराकर प्राण ने बताया कि 16 जुलाई को शिव परिवार की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी। यह प्रतिमा 5 लाख रुपये की कीमत से बनवाई गई है। दूसरे सोमवार को दंगल होगा। 11 अगस्त से लगातार भंडारा होगा पर सोमवार को भक्तों की भीड़ की वजह से भंडारा नहीं होगा। पार्किंग मंदिर के बगल में स्थित मैदान में निशुल्क होगी।
 

सिद्धनाथ मंदिर जाजमऊ में

शिव पूजा
मंदिर के पट भोर में 4 बजे खुलेंगे। सोमवार के दिन भोर में 3 बजे से खुलेंगे। इसके बाद दोपहर में 12 बजे बंद होंगे और 12.30 बजे खुलेंगे और देर रात तक  11 बजे बंद होंगे। सोमवार के दिन रात में 11.30 बजे आरती के बाद रात 12 बजे बंद होंगे। मंदिर के पुजारी मुन्नीलाल पांडेय ने बताया कि यहां पर प्रतिदिन रूद्राभिषेक होगा। पार्किंग मनोहर लाल इंटर कॉलेज के आसपास खाली पड़ी जगह पर निशुल्क होगी।
 
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वनखंडेश्वर मंदिर पी रोड में

शिव पूजा
मंदिर के पट सुबह पांच बजे खुलेंगे। सोमवार को भोर में चार बजे से खुलेंगे। इसके बाद दोपहर एक बजे बंद होकर शाम को चार बजे खुलेंगे और रात में 10 बजे बंद होंगे। सोमवार के दिन दोपहर में खुले रहेंगे और रात में 11 बजे बंद होंगे। बाबा वनखंडेश्वर समिति के अध्यक्ष रमेश दीक्षित ने बताया मंदिर आनंदेश्वर बाबा के छोटे भाई के नाम से वनखंडेश्वर को जाना जाता है। सावन मास में एक सोमवार को बाबा वनखंडेश्वर के दर्शन की महत्ता है। यह मंदिर काफी प्राचीन है। शहर के अलावा आसपास के जिलों से भी भक्त दर्शन को मंदिर पहुंचते है। खास बात यह है कि मंदिर में रामबाग, पीरोड, सीसामऊ, प्रेमनगर, गोपाल टॉकीज, नेहरू नगर, जवाहर नगर आदि क्षेत्रों में रहने वाले युवकों की बारात जाने से पहले वर मंदिर के दर्शन करने अवश्य आता है। सावन मास में मंदिर में चार श्रृंगार बर्फ, फूल, पेड़ पौधों तथा मेवा का होता है। इसके अलावा 20 जुलाई को भंडारा भी आयोजित होगा।
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