फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंदरों ने करा दी स्कूल में छुट्टी, वन विभाग आज रखवाएगा पिंजड़ा

Sat, 21 Nov 2015 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
जी हां, यह सच है कि गुजैनी के पीवीएस पब्लिक स्कूल में बंदरों के आतंक के चलते छुट्टी करनी पड़ी। स्कूल शुक्रवार से रविवार तक बंद रहेगा। प्रिंसिपल महेंद्र सिंह का कहना है कि सुरक्षा के सारे इंतजाम होने के बाद ही सोमवार को स्कूल खोला जाएगा।
विज्ञापन


बता दें, बुधवार को स्कूल में बंदरों के झुंड ने हमला बोल दिया था। तीसरी की छात्रा जाह्नवी, दसवीं के छात्र अभिषेक व अमित और छठवीं की छात्रा नेहा यादव को काट लिया था। कई छात्र डर से गिरकर चुटहिल हो गए थे। गुरुवार सुबह जब स्कूल खुला तो बच्चों की उपस्थिति रोज की अपेक्षा बहुत कम रही।

बच्चों के अभिभावकों ने भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए। इस पर प्रबंधन ने अंग्रेजी और हिंदी माध्यम दोनों स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी करने का निर्णय लिया। प्रिंसिपल का कहना है कि खुले स्थानों में जाली लगवाने के बाद ही स्कूल में पढ़ाई शुरू करेंगे। यह सारे काम रविवार तक करा लिए जाएंगे।
विज्ञापन


गुजैनी में बच्चों पर कटखने बंदर के हमले के बाद वन विभाग के अधिकारी जागे हैं। डीएफओ (डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफीसर) ने रेंजर को प्रभावित क्षेत्र में पिंजड़ा रखवाने के निर्देश दिए हैं।

रेंजर दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार सुबह पिंजड़ा रखवा दिया जाएगा। डीएफओ रामकुमार ने बताया कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत वन विभाग बंदरों को नहीं पकड़ता।

उन्होंने आगरा में बंदर काटने के मामले में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नगर निगम क्षेत्र में बंदर आदि जानवरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की है।

करीब छह महीने पहले नगर निगम के सहयोग से मथुरा से बंदर पकड़ने वाला लाया गया था। बाद में वह काम छोड़कर चला गया। उन्होंने बताया कि बंदर के आतंक की सूचना पर वन विभाग पिंजड़ा रखवाता है।

बंदर पकड़ने के बाद उन्हें बिठूर के जंगलों में छोड़ दिया जाएगा। उधर, शुक्रवार को वन विभाग की टीम ने भी क्षेत्र का निरीक्षण भी किया।

कौशलपुरी में लंगूरों ने खत्म कराया आतंक
कौशलपुरी में लंगूरों ने कटखने बंदरों का आतंक खत्म करा दिया है। 2011 में कई लोग बंदरों के हमले से घायल हो गए। पार्षद सत्येंद्र मिश्रा ने दो लंगूर एक साल के लिए फतेहपुर से मंगवाए। जहां-जहां बंदर उत्पात मचाते थे, वहां-वहां लंगूर एक साथ साल भर तक रखे गए। इन पर करीब सात हजार रुपये महीना खर्च आया था।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें