इसी तरह सीएसए में वोट डालने पहुंचे सुशील और अर्चना गुप्ता का वोट भी अलग-अलग बूथों पर था। इसके अलावा स्नातक और शिक्षक एमएलसी के बीच मतदान में बड़ा अंतर देखने को मिला। इसकी वजह यह रही कि एमएलसी से स्नातक मतदाताओं की संख्या कई गुना अधिक है। स्नातक में 2.10 लाख, जबकि शिक्षक में मात्र 19 हजार मतदाता थे। भाजपा के स्नातक प्रत्याशी अरुण पाठक का कहना है कि कम मतदाताओं के निकलने की वजह यह भी है कि बहुत से मतदाता शहर से बाहर जाकर नौकरी करते हैं और शाम को घर लौटते हैं। ऐसे में वे वोट नहीं डाल सके।