लगभग 15 मिनट रुकने के बाद उन्हें एसीएमएम द्वितीय की अदालत में ले जाया गया, जहां अभियोजन अधिकारी सिद्धार्थ सिंह व अम्ब्रीश टंडन ने पुलिस की ओर से बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान के निवास प्रमाण पत्र के लिए इरफान द्वारा लैटर जारी करने की बात कहते हुए मुकदमे में इरफान को आरोपी बताकर रिमांड मांगा।
13 फरवरी तक रिमांड मंजूर
कोर्ट ने क्षेत्राधिकार न होने की बात कही। जिस पर इरफान को एमपीएमएलए लोअर कोर्ट के विशेष न्यायाधीश आलोक यादव की अदालत में लाया गया। यहां अभियोजन अधिकारी शैलेश अगिभनहोत्री व विनोद पांडे ने इरफान के रिमांड की मांग की। जिस पर कोर्ट ने 13 फरवरी तक के लिए रिमांड मंजूर कर लिया।
सुनवाई के बाद महाराजगंज जेल भेजा
उधर, कर्नलगंज थाने में वर्ष 2017 में चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन के मामले में इरफान ने बयान दर्ज कराए। अभियोजन अधिकारी रिचा गुप्ता ने बताया कि अगली तारीख पर मुकदमे बहस शुरू हो जाएगी। शाम लगभग साढ़े चार बजे इरफान को न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद महाराजगंज जेल के लिए रवाना कर दिया गया।
इरफान बोले- मैं हिंदी में हस्ताक्षर ही नहीं करता
बांग्लादेशी नागरिक का निवास प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में इरफान सोलंकी ने कहा कि जो लैटर हेड इस्तेमाल किया गया उस पर बने हिंदी के हस्ताक्षर मेरे कैसे हो सकते हैं। मैं हिंदी में हस्ताक्षर करता ही नहीं हूं। जेल में मुझसे लगभग 1300 हस्ताक्षर करवाए गए फिर भी पुलिस कुछ हासिल नहीं कर सकी।
रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई थी शिकायत
जिस तारीख को लेटर जारी किया गया था तब मैं लंदन में था। ये बातें इरफान ने रिमांड पर सुनवाई के दौरान अदालत में कही। उनके अधिवक्ता गौरव दीक्षित ने बताया कि बांग्लादेशी नागरिक का पता चलते इरफान ने डॉ. रिजवान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए 15 दिसंबर को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। डॉ. रिजवान के खिलाफ 12 दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
जेल अधीक्षक से तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
महाराजगंज जेल में इरफान के स्वास्थ्य की जांच कराई गई या नहीं। जेल में उनका क्या इलाज किया गया। इस संबंध में जेल अधीक्षक से तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। इरफान के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में अर्जी देकर कहा गया कि इरफान की किडनी में स्टोन है। उनका जेल में ठीक से इलाज नहीं किया जा रहा है।
बीवी-बच्चों से मिले
पेशी के बाद कोर्ट पहुंचे इरफान से उनकी बीवी, बच्चे, बहन व अन्य रिश्तेदारों ने मुलाकात की। कोर्ट से बाहर निकलते वक्त अपने समर्थकों से इरफान सोलंकी ने कहा कि कोई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूर-ए-खुदा होता है। इरफान ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया।