नौगाईं में घर के अंदर अकेले बैठ कर समय काटते मुंबई से लौटे मजदूर
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कोरोना ने रोजगार छीन लिया...घर आए तो उम्मीद थी कि खाली पेट ही सही, अपनों के बीच वक्त अच्छा कटेगा। यहां आकर पता चला कि कोरोना ने पेट पर ही लात नहीं मारी, संबंधों को भी तितर-बितर कर दिया है।
यह दर्द किसी एक प्रवासी मजदूर का नहीं है। अपनों से आसरे की चाहत में लौटे तकरीबन हर प्रवासी मजदूर को ऐसे हालातों से गुजरना पड़ रहा है। छिबरामऊ ब्लाक के गांव नौर्गाइं पहुंचे प्रवासी मजदूर अकेलेपन से जूझ रहे हैं। मुंबई से लौटे प्रवासी मजदूर खालिद, छोटे खां, कलीम खां से न सिर्फ परिजनों, बल्कि गांव के लोगों ने भी दूरी बना रखी है।
14 दिन क्वारंटीन रहने के बाद भी कोई इनके पास जाने को तैयार नहीं है। यह घरों से बाहर निकलते हैं तो कोरोना के भय से गांव वाले दहशतजदा हो जाते हैं। परिवार वालों से शिकायतें करने लगते हैं। गांव के जो दोस्त कभी दिन भर साथ रहते थे, वह अब पास आने से कतराते हैं। प्रवासी मजदूर अपनों के बीच बेगानों की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं।