रविवार (20 दिसंबर) को पड़ी ठंड ने 44 साल का रिकार्ड तोड़ दिया। इससे पहले दिसंबर में कभी इतनी ठंड नहीं पड़ी। न्यूनतम पारा लुढ़ककर एक डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि देहरादून और जम्मू का न्यूनतम पारा तीन डिग्री रहा। ठंड का असर ऐसा रहा कि सुबह से निकली तेज धूप भी राहत नहीं दे सकी।
जैसे-जैसे शाम हो रही थी, गलन बढ़ती जा रही थी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि रिकार्ड तोड़ ठंड का मुख्य कारण पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और पछुवा हवाएं हैं।
इसके अलावा वायुमंडल की ऊपरी सतह में धुंध और कोहरा अधिक होने से भी ठंड बढ़ी है। डॉ. दुबे ने बताया कि दो दिन तक न्यूनतम तापमान 1.0 से 4.0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर के बाद हवाओं की दिशा दक्षिण पूर्वी होने की संभावना है।
ऐसा हुआ तो वातावरण में नमी बढ़ेगी और रात का पारा चढ़ेगा। इससे रात व दिन के तापमान और सुबह व दोपहर की आर्द्रता (नमी) में भी उतार चढ़ाव होगा।