कानपुर। पानी संकट पर जलकल विभाग के आंकड़ों की बाजीगरी मंगलवार को फेल हो गई। कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के सामने जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, नगर निगम औरजल निगम के अफसरों ने जलकल के झूठ की पोल खोल दी और साफ कर दिया कि शहर में पानी का गंभीर संकट है। इसको जलकल विभाग गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसी का नतीजा रहा कि गुस्साए कमिश्नर बिफर पड़े। बर्रा-7 के जेई को जमकर फटकारा और कहा कि जलकल विभाग के अफसर 4-5 घंटे तक फील्ड विजिट करें। जनता, जनप्रतिनिधि और मीडिया से फीडबैक लें और समस्याओं का निराकरण कराएं। इसमें हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देरशाम तक दफ्तर में बैठकर काम करने की जरूरत है। जैसा कि कमिश्नर और जिलाधिकारी कर रहे हैं।
पेयजल संकट पर मंगलवार की शाम कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने कैंप कार्यालय में मीटिंग बुलाई। सबसे पहले जलकल विभाग के महाप्रबंधक जवाहर राम ने आंकड़ा पेश किया। कहा कि पेयजल सामान्य है। पिछले साल अप्रैल में रोजाना 412 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जा रही थी, इस बार 430 एमएलडी की सप्लाई दी जा रही है। सभी नलकूप दुरुस्त हैं। 9000 से ज्यादा हैंडपंप अच्छी तरह से चल रहे हैं। जलकल विभाग के अधिशासी और अवर अभियंताओं ने लीकेज दुरुस्त करने की उपलब्धि भी गिनाई लेकिन माइक जैसे ही जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के पास पहुंचा, वैसे ही पासा पलट गया। कमिश्नर के सामने ही जिलाधिकारी ने कहा कि जलकल विभाग के अफसर फील्ड पर नहीं जाते हैं। पेयजल संकट दिख रहा है, फिर भी अफसर आंख मूंदकर बैठे हैं। घरों में सीवरेज का गंदा पानी भी जा रहा है। समस्या पर तत्काल टैंकर भेजने का इंतजाम नहीं है। 110 वार्ड हैं लेकिन टैंकर 40 हैं। तकनीकी खराबी तत्काल ठीक करने का इंतजाम नहीं है। कंट्रोल रूम प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा। गंभीर संकट है, फिर भी गैंगमैन क्षमता के हिसाब से काम नहीं कर रहे हैं।