एसडीएम सदर दीपक पाल ने बताया कि शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 51 अफसरों से जांच कराई गई थी। इसमें 19 लेखपाल 409 अपात्रों को पात्र करने के दोषी पाए गए थे।
शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में अपात्रों को पात्र बनाने के आरोप में निलंबित किए गए 19 लेखपालों एवं पूर्व तहसीलदार सदर (अब उन्नाव में तैनात) अतुल कुमार के खिलाफ कोतवाली थाने में धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
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पूर्व तहसीलदार पर आरोप है कि उन्होंने गलत रिपोर्ट लगाकर निलंबित किए गए 19 में से 10 लेखपालों को बहाल कर दिया। शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में फर्जीवाड़े के संबंध में एक रिपोर्ट बर्रा थाने में पहले से ही दर्ज है, जिसकी पुलिस विवेचना चल रही है।
एसडीएम सदर दीपक पाल ने बताया कि शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 51 अफसरों से जांच कराई गई थी। इसमें 19 लेखपाल 409 अपात्रों को पात्र करने के दोषी पाए गए थे।
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आठ जुलाई को इन्हें निलंबित कर दिया गया था। इधर 25 जुलाई के आसपास तत्कालीन तहसीलदार अतुल कुमार का तबादला उन्नाव हो गया। यहां से रिलीव होने से पहले अतुल कुमार ने 10 लेखपालों को बहाल कर दिया।
31 जुलाई को जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में इस प्रकरण को गोविंदनगर से भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी और एमएलसी सलिल विश्नोई ने उठाया तो जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने इसे संज्ञान लिया।
जांच कराई तो पता चला कि तत्कालीन तहसीलदार ने निलंबित लेखपालों की रिपोर्ट पर बहाल कर दिया, जबकि उन्हें प्रपत्रों के सत्यापन के लिए खुद मौके पर जाना चाहिए था। इस तरह से तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल मिलीभगत के आरोपी पाए गए। इस पर जिलाधिकारी के आदेश पर सदर तहसीलदार ने इनके खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
तत्कालीन सदर तहसीलदार अतुल कुमार समेत लेखपाल आलोक कुमार, स्नेह हंस शुक्ला, गुलाब सिंह, प्रीति दीक्षित, नीतू त्रिपाठी, अजय कुशवाहा, सुजीत कुशवाहा, पीयूष सिंह, हर नारायण दुबे, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, रामखिलावन भारती, अरविंद तिवारी, दिलीप सचान, सुशील कुमार, आशीष यादव, हरिशंकर विश्वकर्मा, अश्वनी कुमार, देवेंद्र बाजपेई और धर्मपाल।