कानपुर स्थित सीएसए के हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं पर कैंपस से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यहां तक की छात्राएं अब किसी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग भी नहीं कर पाएंगी। कमरे में खाना भी नहीं बना पाएंगी और बाहर से भी खाने का कुछ ऑर्डर नहीं दे पाएंगी।
विवि प्रशासन ने छात्राओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इसके मुताबिक छात्राएं अब शनिवार और रविवार को छोड़कर अन्य दिनों में कभी भी कैंपस छोड़कर नहीं जा सकतीं। शनिवार और रविवार को भी छात्राओं को सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक ही बाहर जाने की अनुमति होगी। वहीं छात्राओं ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए मानने से इंकार कर दिया है।
हॉस्टल में नोटिस चस्पा होते ही हड़कंप मच गया। छात्राएं हॉस्टल से निकलकर प्रदर्शन करने लगीं। पहले गृह विज्ञान विभाग के बाहर प्रदर्शन किया और फिर जुलूस की शक्ल में मार्च करते हुए कुलपति कार्यालय तक पहुंच गईं। यहां हॉस्टल की वार्डेन और डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. हरेश प्रताप सिंह ने छात्राओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई बात नहीं बनी। छात्राओं ने चेतावनी दी की जब तक विवि प्रशासन अपने फैसले को वापस नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
भेदभाव करने का आरोप
छात्राओं ने विवि प्रशासन पर लड़के और लड़कियों में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। कहा कि एक तरफ लड़कों को रात में निकलने की छूट दी जाती है, दूसरी ओर छात्राओं को पढ़ने के लिए कोचिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है।
पांच बजे के बाद कोई नहीं मिल सकता
डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. हरेश प्रताप सिंह की ओर से जारी आदेश के मुताबिक गर्ल्स हॉस्टल में अब शाम पांच बजे के बाद छात्राएं किसी भी बाहरी से नहीं मिल सकतीं। न पैरेंट्स से मिल सकती हैं न ही दोस्तों से। मिलने के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी। सुबह अगर किसी छात्रा की कक्षा होगी तो उसे इसके लिए अपने शिक्षक से अनुमति पत्र लाना होगा, तभी वह हॉस्टल से बाहर निकल सकेगी। इंटर्नशिप, रावे, इंडस्ट्रियल टूर के लिए भी तभी अनुमति दी जाएगी, जब छात्रा का विभागाध्यक्ष मंजूरी देगा।
छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाए गए हैं। वार्डेन और छात्राओं ने आपस में बैठकर सभी बिंदुओं पर चर्चा कर ली है। कोई विवाद नहीं है।
- प्रो. हरेश प्रताप सिंह, डीएसडब्ल्यू, सीएसए