रेलवे कर्मचारियों ने आर्थिक सहायता में ऐसे रुपये दिए हैं जो चलते ही नहीं
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रविवार तड़के रेल हादसे के बाद पूरे दिन मृतकों की संख्या में इजाफा होता रहा। शाम होते-होते एक सैकड़ा मृतकों के पहुंचने से पोस्टमार्टम हाउस में शव रखने की जगह नहीं बची। इस पर शवों को बाहर धूप में ही खुले में रख दिया गया। पोस्टमार्टम हाउस में शव रखने के लिए एक भी डीप फ्रीजर न होने के चलते दुर्गंध उठने लगी।
देर शाम शवों की संख्या डेढ़ सैकड़ा पार होने पर लोगों का शव इसी तरह रखने पर आक्रोश पनपने लगा। इस पर आनन-फानन छोटे वाहनों व ट्रकों से बर्फ की सिल्लियों की व्यवस्था की गई।
रेल दुर्घटना के शिकार लोगों को रेलवे विभाग के कर्मचारियों द्वारा पांच-पांच सौ के नोट इलाज के लिए सहायता के रूप में दिए गए। इस पर वहां पर मौजूद कुछ लोगों ने विरोध किया। उनका कहना था कि रेलवे के क र्मचारियों ने आर्थिक सहायता में ऐसे रुपये दिए हैं जो चलते ही नहीं।
वहां मौजूद लोगों ने इसकी शिकायत घायलों का हालचाल लेने आए केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से शिकायत की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शीघ्र ही नोट बदलवाने के साथ जांच भी कराई जाएगी और दोषी रेल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई क ी जाएगी।