मनीष हत्याकांड में पुलिस मामले को अपने हिसाब से दबाने में लगी थी। इस पर उन्होंने शव की अपने मोबाइल से कई फोटो लीं। उन्हें पहले कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें, तभी उन्हें याद आया कि मनीष ने ही उन्हें दुनिया के सामने अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया को सशक्त माध्यम बताया था।
मनीष तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वह मुझे अपनी बात सबके सामने रखने का तरीका बता गए। उन्हीं के बताए रास्ते पर चलकर मैंने दुनिया के सामने उनके साथ हुई क्रूरता की तस्वीर साझा की। लोगों ने मेरा साथ दिया और पुलिस-प्रशासन को सच के सामने झुकना पड़ा।
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पति के हत्यारों को सख्त सजा दिलाना ही अब मेरी जिंदगी का मकसद बन चुका है। यह बातें गोरखपुर में पुलिस की पिटाई से जान गंवाने वाले बर्रा तीन निवासी मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी ने एक निजी चैनल को दिए गए साक्षात्कार के दौरान कहीं।
मीनाक्षी ने बताया कि घटना के दूसरे दिन सुबह वह परिवार के साथ गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल पहुंचीं, जहां मनीष का शव देखकर चीख पड़ी थीं। उनके माथे पर एक तरफ चोट का गहरा निशान था। बाजू की हड्डी दिख रही थी। पूरा चेहरा खून से सना था।
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सुबह 10:30 बजे के बाद भी उनकी मदद के लिए कोई वहां नहीं पहुंचा। पुलिस भी मामले को अपने हिसाब से दबाने में लगी थी। इस पर उन्होंने शव की अपने मोबाइल से कई फोटो लीं। उन्हें पहले कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें, तभी उन्हें याद आया कि मनीष ने ही उन्हें दुनिया के सामने अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया को सशक्त माध्यम बताया था।
इस पर उन्होंने मनीष के शव के पास ही खड़े होकर तुरंत अपना ट्विटर अकाउंट बनाया। मनीष की फोटो पोस्ट कर अपनी आपबीती दुनिया के सामने रखी। ट्वीट वायरल हुआ तो लोग खुद-ब-खुद मदद के लिए सामने आने लगे।
अब जीती नहीं, सिर्फ जिम्मेदारी निभा रही
अब मैं जिंदगी जीना भूल चुकी हूं। बेटे और परिवार के लिए बस जिम्मेदारी निभा रही हूं। मुझे चॉकलेट और फूल बहुत पंसद थे। मनीष अक्सर मेरे लिए लेकर आते थे, लेकिन अब न तो फूलों में खुशबू है और न ही चॉकलेट में कोई स्वाद। मेरे पास आज सबकुछ है। पैसे हैं, नौकरी है, लेकिन मनीष नहीं हैं।
यह कहते हुए मीनाक्षी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अविराज अपने पापा के हत्यारों को मारने की बात करता है, लेकिन वह उसे समझाकर शांत करा देती हैं। अविराज को वह एक नेक इंसान बनाना चाहती हैं। बताया कि अपने जैसी औरतों की मदद के लिए एक एनजीओ भी शुरू किया है, जिसका सपना मनीष ने ही देखा था।