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मनीष गुप्ता हत्याकांड: होटल प्रशासन के खिलाफ पुख्ता सुबूत, नहीं बनाया आरोपी, मेहरबानी जारी

Sun, 10 Oct 2021 01:27 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर के कारोबारी मनीष की मौत का मामला। - फोटो : अमर उजाला।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड में गोरखपुर के होटल कृष्णा पैलेस प्रशासन के खिलाफ साक्ष्य मिटाने के पुख्ता सुबूत हैं। सीसीटीवी फुटेज से लेकर चश्मदीद गवाह हैं। मगर एसआईटी ने अब तक होटल प्रशासन को आरोपी नहीं बनाया है। होटल प्रशासन पर मेहरबानी जारी है। एसआईटी होटल प्रशासन को गवाह बनाने की तैयारी में है।
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सवाल है कि जब अपराध में उनकी कहीं न कहीं भूमिका है तो उनपर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। मीनाक्षी ने भी इस पर सवाल उठाए हैं।वारदात के बाद होटल प्रशासन ने कमरे, सीढ़ियों और गैलरी आदि जगह से खून साफ किया था। यह सबकुछ सीसीटीवी में कैद है। होटल प्रशासन ने इस बात को कबूला भी है।
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मनीष हत्याकांड: लिफ्ट से निकलने के बाद दरोगा ने मनीष के ऊपर से तौलिया हटा दिया और बगल में खड़े युवक को थमा दिया। - फोटो : अमर उजाला।
एसआईटी की जांच में इसकी पुष्टि भी हुई है। लेकिन एसआईटी ने होटल प्रशासन को अभी तक आरोपी नहीं बनाया है। इसको लेकर मीनाक्षी गुप्ता का कहना है कि वह शुरू से ही मांग कर रही हैं कि होटल प्रशासन को केस में शामिल किया जाए। उनके अधिवक्ता ने उनको बताया है कि होटल प्रशासन धारा (201) के तहत आरोपी बनाए जाने चाहिए।

आखिर एसआईटी उनको आरोपी क्यों नहीं बना रही है ये सवाल अब उठने लगा है। मीनाक्षी ने शनिवार को कहा कि वह इस संबंध में एसआईटी के अफसरों से बातचीत करेंगी। जरूरत पड़ी तो प्रार्थना पत्र भी देंगी। उनका यह भी कहना है कि अगर पुलिस के साथ सांठगांठ कर होटल प्रशासन ने पुलिसकर्मियों को बुलाया था तो साजिश में शामिल होने की धारा भी लगाई जाए। 

सीधे तीसरी मंजिल पर पहुंचे थे पुलिसकर्मी
मीनाक्षी का कहना है कि उस रात होटल में सात कमरे बुक थे। पुलिस सीधे तीसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर 512 में ही क्यों गई। यह बड़ा सवाल है। उनका कहना है कि अभी तक यही स्पष्ट हुआ है कि वसूली के लिए पुलिसकर्मी गए थे। ऐसे में अन्य कमरों के लोगों को टारगेट क्यों नहीं किया। इसकी तफ्तीश सही से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह मांग करेंगी कि केस का ट्रायल भी कानपुर में ही हो। जिससे केस की पैरवी करने में उनको सहूलियत हो।
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