मां को छोड़कर नहीं गया शशांक
रास्ते में अचानक बस में आग लग गई। देखते ही देखते बस में धुआं भर गया और यात्रियों में अफरातफरी मच गई। सुनीता के पैरों में दर्द होने के कारण वह तेजी से बस से बाहर नहीं निकल पा रही थीं। ऐसे में शशांक ने मां को अकेला छोड़कर निकलने के बजाय उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। परिजनों के अनुसार चालक, परिचालक और सुनीता ने भी शशांक से पहले बाहर निकलने के लिए कहा था, लेकिन वह मां को छोड़कर नहीं गए।
बस चालक और परिचालक पर लापरवाही का आरोप
धुआं बढ़ने के कारण दोनों बेहोश हो गए और आग की चपेट में आ गए। हादसे में दोनों की मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों ने बस चालक और परिचालक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यात्रियों ने बस में जलने की गंध आने की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते बस को रोककर जांच नहीं की गई। हालांकि, बस में आग लगने की वास्तविक वजह और हादसे में किसी स्तर पर लापरवाही हुई यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
डीएनए जांच से हुई शवों की पहचान
आग इतनी भीषण थी कि शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया था। इसके बाद डीएनए जांच और परिजनों की पहचान के आधार पर सुनीता गुप्ता और शशांक गुप्ता के शवों की पुष्टि हुई। दोनों की मौत की खबर मिलते ही चरखारी और महोबा में शोक की लहर दौड़ गई।
पूर्व सांसद समेत कई नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की
हादसे की जानकारी मिलने के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का नीरज गुप्ता के आवास पर पहुंचना शुरू हो गया। पूर्व सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल समेत कई नेताओं ने परिवार से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। मां को बचाने की कोशिश में बेटे की मौत की घटना से परिवार और परिचितों में गहरा दुख है।